ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की कथित मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया है। जहां कई देशों ने खुलकर प्रतिक्रिया दी, वहीं भारत ने अब तक आधिकारिक तौर पर न तो निंदा की है और न ही श्रद्धांजलि दी है। इस चुप्पी को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह खामोशी किसी दबाव का परिणाम नहीं, बल्कि एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति है, जिसमें राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी गई है।
खामेनेई की मौत और बढ़ता वैश्विक तनाव
ईरान और Israel के बीच जारी सैन्य टकराव ने पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया हमले में Ayatollah Ali Khamenei और उनके परिवार के सदस्य भी मारे गए। इस हमले को United States और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई बताया जा रहा है। हालांकि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की ओर से इस पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने अब तक खामेनेई की मौत की निंदा नहीं की है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में केवल इतना कहा है कि “भारत पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थन करता है।” इस संतुलित बयान को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं, वहीं सरकार समर्थक इसे परिपक्व विदेश नीति बता रहे हैं।
देश के भीतर राजनीतिक प्रतिक्रिया
देश के कई हिस्सों—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक—इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। विपक्षी दलों ने इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और अमेरिकी नेतृत्व पर निशाना साधा है। हालांकि केंद्र सरकार ने किसी भी पक्ष का नाम लिए बिना शांति की अपील दोहराई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: रिश्ते लेकिन मतभेद भी
भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा सहयोग, चाबहार पोर्ट और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर दोनों देश साथ काम करते रहे हैं। लेकिन कई मौकों पर मतभेद भी सामने आए। 2017 से 2024 के बीच Ayatollah Ali Khamenei ने कश्मीर, अनुच्छेद 370 और नागरिकता संशोधन कानून जैसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी की थी, जिसे नई दिल्ली ने ‘अनुचित’ माना था।
वैश्विक परिदृश्य: कौन किसके साथ?
- अगर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर नजर डालें तो भारत का रुख अलग-थलग नहीं दिखता।
- G7 के किसी सदस्य देश ने औपचारिक श्रद्धांजलि जारी नहीं की।
- United Kingdom, Canada और Australia ने अमेरिका-इजरायल के रुख का समर्थन किया।
- Saudi Arabia और United Arab Emirates ने संयमित प्रतिक्रिया दी।
- Organization of Islamic Cooperation के सीमित सदस्य देशों ने ही खुलकर निंदा की।
- वहीं Russia, China और Pakistan जैसे देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
भारत की रणनीति: राष्ट्रहित पहले
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की चुप्पी के पीछे तीन प्रमुख कारण हो सकते हैं:
- ऊर्जा सुरक्षा – खाड़ी देशों से तेल आयात भारत की जरूरत है।
- प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा – लाखों भारतीय पश्चिम एशिया में काम करते हैं।
- संतुलित विदेश नीति – अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना।
भारत की विदेश नीति परंपरागत रूप से ‘संतुलन’ और ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर आधारित रही है।