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नई दिल्ली कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में बड़ा न्यायिक मोड़ सामने आया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia समेत सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि केवल आरोप लगाने से अपराध सिद्ध नहीं होता, आरोपों को ठोस और पर्याप्त सबूतों से साबित करना जरूरी है। इस फैसले ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

नई दिल्ली: की सियासी फिजा में शुक्रवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। जिस आबकारी नीति को लेकर दिल्ली की राजनीति में भूचाल आया था, नेताओं की गिरफ्तारी हुई थी और महीनों तक आरोप-प्रत्यारोप की आंधी चली थी, उसी मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। Rouse Avenue Court ने सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इनकार करते हुए साफ कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल दावे या अनुमान के आधार पर किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत की दो-टूक टिप्पणी

विशेष न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में कई गंभीर कमियां हैं। आरोपपत्र में जिन तथ्यों का उल्लेख किया गया, उनका समर्थन करने वाले साक्ष्य पर्याप्त नहीं पाए गए। अदालत का साफ रुख था— न्यायालय आरोपों पर नहीं, सबूतों पर चलता है। इसी आधार पर अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों को बरी कर दिया गय

किसे मिली राहत?

इस मामले में कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण पिल्लई, मूथा गौतम, समीर महेंद्रू, अमनदीप सिंह धल्ल, अर्जुन पांडे, के. कविता, दुर्गेश पाठक सहित कई अन्य नाम शामिल थे। अदालत के फैसले के बाद सभी को बड़ी राहत मिली है।

केजरीवाल का बयान: “सत्य की जीत”

फैसला आते ही आम आदमी पार्टी के दफ्तर में हलचल तेज हो गई। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वर्षों से उन्हें और उनकी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश की गई। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए इसे “सत्य की जीत” करार दिया।केजरीवाल ने कहा, “हमारे खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध के तहत केस बनाए गए। आज अदालत ने साफ कर दिया कि बिना सबूत आरोप टिकते नहीं।”

सिसोदिया बोले- संविधान पर गर्व

मनीष सिसोदिया ने भी अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश के संविधान और न्याय व्यवस्था की ताकत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अगर सबूत मजबूत नहीं हों तो अदालत किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा सकती।

क्या था पूरा मामला?

नवंबर 2021 में दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की थी। सरकार का दावा था कि इससे राजस्व बढ़ेगा और अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी। लेकिन जल्द ही विपक्ष ने आरोप लगाया कि लाइसेंस वितरण में अनियमितता हुई और कुछ डीलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जुलाई 2022 में नीति वापस ले ली गई। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने जांच शुरू की। अगस्त 2022 में केस दर्ज हुआ, छापेमारी हुई और फिर गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू हुआ। फरवरी 2023 में सिसोदिया की गिरफ्तारी ने सियासत को गरमा दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

अब लंबे घटनाक्रम के बाद अदालत ने आरोपपत्र को ही कमजोर बताते हुए बड़ा फैसला सुना दिया।

घटनाक्रम की टाइमलाइन

  • 17 नवंबर 2021 – नई आबकारी नीति लागू
  • जुलाई 2022 – नीति रद्द
  • अगस्त 2022 – सीबीआई जांच और केस दर्ज
  • फरवरी 2023 – सिसोदिया की गिरफ्तारी
  • विभिन्न दौर की पूछताछ और चार्जशीट
  • अब – अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी

राजनीति पर असर

यह फैसला सिर्फ कानूनी नहीं, राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे नैतिक जीत बता रही है, वहीं विपक्षी दलों के सामने भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक इस फैसले की गूंज सुनाई दे रही है। आने वाले चुनावी समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है।

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