दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने वालों के लिए बड़ी खबर है। रेखा गुप्ता सरकार राजधानी की सभी श्रेणियों (A से H) की संपत्तियों के सर्कल रेट में व्यापक संशोधन की तैयारी कर रही है। कई वर्षों बाद हो रहे इस बड़े बदलाव का उद्देश्य बाजार दरों और सरकारी सर्कल रेट के बीच के अंतर को कम करना, राजस्व बढ़ाना और रियल एस्टेट लेनदेन को पारदर्शी बनाना है। प्रीमियम कॉलोनियों से लेकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के इलाकों तक, इस फैसले का असर हर प्रॉपर्टी खरीदार, विक्रेता और निवेशक पर पड़ेगा।
दिल्ली में सर्कल रेट में बड़ा बदलाव: क्या होगा असर?
राजधानी दिल्ली का प्रॉपर्टी बाजार एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। रेखा गुप्ता सरकार सभी प्रॉपर्टी कैटेगरी — A से लेकर H तक — के सर्कल रेट में व्यापक संशोधन करने की दिशा में काम कर रही है। यह संशोधन कई वर्षों बाद किया जा रहा है और इसे बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप दरों को तर्कसंगत बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
क्यों जरूरी पड़ा यह फैसला?
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में कई प्रीमियम कॉलोनियों में संपत्तियों की वास्तविक खरीद-बिक्री मौजूदा सर्कल रेट से 20 से 30 प्रतिशत अधिक पर हो रही है। इससे रजिस्ट्री के दौरान कागजों में कम मूल्य दिखाने और नकद लेनदेन की प्रवृत्ति बढ़ती है। सरकार का मानना है कि इससे स्टांप ड्यूटी कलेक्शन पर भी असर पड़ता है। आखिरी बार सर्कल रेट में बड़ा संशोधन वर्ष 2014 में हुआ था। उसके बाद दिल्ली के रियल एस्टेट बाजार में काफी बदलाव आए हैं — मेट्रो कनेक्टिविटी, रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स और बिल्डर फ्लोर संस्कृति ने कई इलाकों की कीमतें तेजी से बढ़ाई हैं।
प्रीमियम कॉलोनियों में क्या प्रस्ताव?
कैटेगरी ‘A’ में सर्कल रेट को 7.7 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 8.2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर से अधिक करने का प्रस्ताव है। गोल्फ लिंक्स, जोर बाग, सुंदर नगर और वसंत विहार जैसे इलाकों में बाजार दरें 18 से 22 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंचने की बात सामने आई है। इसी वजह से अति-प्रीमियम क्षेत्रों के लिए A+ कैटेगरी बनाने की मांग भी उठ रही है।
मध्यम वर्गीय इलाकों पर ज्यादा असर
जहां प्रीमियम इलाकों में वृद्धि सीमित हो सकती है, वहीं मध्यम और ऊपरी-मध्यम वर्ग की कॉलोनियों में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। कैटेगरी ‘B’ में कम से कम 32 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव है, जिससे दर 2,45,520 रुपये से बढ़कर लगभग 3,25,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो सकती है। हौज खास, ग्रीन पार्क, पंजाबी बाग और सफदरजंग एन्क्लेव जैसे इलाकों में बाजार लेनदेन सर्कल रेट से 30 से 50 प्रतिशत अधिक बताए जा रहे हैं। बेहतर बुनियादी ढांचा और मेट्रो विस्तार ने इन क्षेत्रों की मांग बढ़ाई है।
रीक्लासिफिकेशन की मांग तेज
इस प्रस्ताव के साथ ही कई इलाकों में पुनर्वर्गीकरण की मांग भी तेज हो गई है। न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के निवासियों ने करीब 70 सुझाव दिए हैं, जिनमें 121 लोगों की सामूहिक याचिका शामिल है। उनका कहना है कि वास्तविक बाजार दरें मौजूदा सर्कल रेट से 35 से 40 प्रतिशत कम हैं, जिससे सौदे अटक रहे हैं। वहीं, कालिंदी कॉलोनी और सुखदेव विहार के निवासियों ने भी डाउनग्रेड की मांग की है। दूसरी ओर, डिफेंस कॉलोनी, ग्रेटर कैलाश (I और II), गुलमोहर पार्क, नीति बाग और पंचशील पार्क के लोग अपनी कॉलोनियों को B से A कैटेगरी में अपग्रेड करने की मांग कर रहे हैं।
निम्न आय वर्ग भी अछूता नहीं
एफ, जी और एच श्रेणी — जिनमें केशव पुरम, कृष्णा नगर, लक्ष्मी नगर, भलस्वा डेयरी, नरेला और बुराड़ी जैसे इलाके शामिल हैं — में 8 से 29 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव है। कैटेगरी ‘C’ की कॉलोनियों जैसे जनकपुरी, सिविल लाइंस, वसंत कुंज, नेताजी सुभाष प्लेस, सीआर पार्क और मालवीय नगर में दरें 2.2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच सकती हैं, जो मौजूदा बाजार लेनदेन के अनुरूप होंगी।
सरकार का मुख्य उद्देश्य
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस कदम का मकसद बाजार को अस्थिर करना नहीं, बल्कि सर्कल रेट और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच की खाई को कम करना है। साथ ही स्टांप ड्यूटी संग्रह बढ़ाना और पारदर्शिता लाना भी प्रमुख उद्देश्य है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा गठित समिति इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही है। सार्वजनिक सुझावों की समीक्षा के बाद प्रस्ताव को मंत्रिमंडल के सामने पेश किया जाएगा।
खरीदारों और निवेशकों के लिए क्या संकेत?
यदि प्रस्ताव लागू होता है तो:
- कई इलाकों में रजिस्ट्री महंगी हो सकती है।
- स्टांप ड्यूटी का बोझ बढ़ सकता है।
- नकद लेनदेन पर लगाम लग सकती है।
- कुछ क्षेत्रों में कीमतों का संतुलन भी संभव है।
दिल्ली का रियल एस्टेट बाजार एक बड़े परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह फैसला बाजार को स्थिर करेगा या अस्थायी झटका देगा, यह देखना दिलचस्प होगा।