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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में नकली दवाओं के कारोबार का एक ऐसा खतरनाक चेहरा सामने आया है, जिसने आम लोगों की सेहत और भरोसे दोनों को झकझोर दिया है। नामी कंपनी हिमालयन की Liv-52 दवा के नाम पर नकली टैबलेट्स बनाकर कई जिलों में सप्लाई करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह में मेडिकल फील्ड से जुड़े लोग भी शामिल थे, जो मुनाफे के लिए लोगों की जान से खुलकर खेल रहे थे।

उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं का कारोबार लगातार एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ताजा मामला गाजियाबाद से सामने आया है, जहां पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग ने मिलकर एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो नामी आयुर्वेदिक दवा हिमालयन Liv-52 की नकली टैबलेट्स बनाकर बाजार में खपा रहा था।

सोनीपत की लैब में बन रही थीं नकली टैबलेट्स

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह हरियाणा के सोनीपत स्थित एक लैब में Liv-52 जैसी दिखने वाली नकली टैबलेट्स तैयार कर रहा था। बाहर से देखने पर ये दवाएं बिल्कुल असली जैसी लगती थीं, जिससे आम ग्राहक ही नहीं बल्कि कई मेडिकल स्टोर संचालक भी धोखे में आ जाते थे।

5 आरोपी गिरफ्तार, सरगना भी शिकंजे में

गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में गिरोह के सरगना समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मोदीनगर के तिबड़ा रोड निवासी मयंक अग्रवाल, दिल्ली के उत्तम नगर निवासी अनूप गर्ग, सुभाषनगर निवासी तुषार ठाकुर, हिंडन विहार निवासी आकाश ठाकुर और निवाड़ी निवासी नितिन त्यागी शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरोह में एक पैरामेडिकल छात्र भी शामिल था, जो दवाओं से जुड़ी बुनियादी जानकारी का इस्तेमाल इस अवैध धंधे में कर रहा था।

भारी मात्रा में नकली दवाएं बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 50 हजार नकली टैबलेट्स, 1200 खाली सफेद डिब्बियां और ढक्कन, 500 प्रिंटेड रैपर और एक कार बरामद की है। यह सामग्री साफ तौर पर इस बात का सबूत है कि यह कोई छोटा-मोटा खेल नहीं बल्कि पूरी तरह संगठित और बड़े स्तर पर चलाया जा रहा रैकेट था।

हिमालयन कंपनी के नाम पर खुली धोखाधड़ी

यह गिरोह हिमालयन वैलनेस कंपनी के प्रतिष्ठित ब्रांड नाम का गलत इस्तेमाल कर रहा था। जनवरी महीने में कंपनी की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी कि बाजार में उनकी Liv-52 दवा के नाम से नकली टैबलेट्स बेची जा रही हैं। इसके बाद मुरादनगर थाने में धोखाधड़ी और कॉपीराइट एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ।

कैसे सामने आया पूरा मामला?

डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी के अनुसार, कंपनी के प्रतिनिधियों को अलीगढ़ में नकली टैबलेट्स की बिक्री की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस और ड्रग विभाग ने संयुक्त जांच शुरू की, जिसमें धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं।

मेरठ से बनती थी पैकेजिंग सामग्री

जांच में यह भी सामने आया कि नकली दवाओं की पैकेजिंग पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से कराई जा रही थी।

  • सफेद डिब्बियां और ढक्कन मेरठ के एकता प्लास्टिक उद्योग के मालिक कमालुद्दीन से मंगाए जाते थे।
  • प्रिंटेड रैपर खैरनगर चौपला के पास मुज्जमिल की प्रिंटिंग प्रेस से तैयार होते थे।
  • डाई बनाने की मशीन शकील, जमनानगर नवीन मंडी से बनवाई गई थी।

गिरोह में बंटा हुआ था काम

गिरोह के सदस्यों ने काम आपस में बांट रखा था।

  • नितिन त्यागी का मोदीनगर में मेडिकल स्टोर है, जहां से सप्लाई होती थी।
  • मयंक अग्रवाल पहले मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव रह चुका है, जिसे दवा बाजार की गहरी समझ थी।
  • अनूप गर्ग मयंक का रिश्तेदार है और फाइनेंस संभालता था।
  • तुषार ठाकुर पैरामेडिकल छात्र है।
  • आकाश ठाकुर दवाओं की सप्लाई में मदद करता था।

कई जिलों में हो चुकी थी सप्लाई

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह पिछले चार महीनों से सक्रिय था और अलीगढ़, मथुरा, बिजनौर, आगरा, मेरठ और शामली जैसे जिलों में नकली दवाओं की सप्लाई कर चुका था।

ड्रग कंट्रोल विभाग की चेतावनी

ड्रग इंस्पेक्टर आशुतोष मिश्रा ने कहा कि विभाग लगातार नकली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। हाल के महीनों में कई मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और आगे भी सख्त अभियान चलाया जाएगा। हालांकि, गाजियाबाद में नकली दवाओं का बढ़ता कारोबार ड्रग विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। लोनी, खेड़ा और इंदिरापुरम जैसे इलाकों में छोटी इकाइयों में कैंसर की दवाओं और प्रतिबंधित कफ सिरप तक बनाए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

सेहत से खिलवाड़, सिस्टम पर सवाल

नकली Liv-52 जैसी दवाएं केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ हैं। यह मामला बताता है कि मुनाफे के लालच में कुछ लोग किस हद तक गिर सकते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर इस खतरनाक कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगा पाता है या नहीं।

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