गौतमबुद्ध नगर में 108 एम्बुलेंस सेवा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आपातकाल में यह सेवा केवल वाहन नहीं, बल्कि जीवन की आख़िरी उम्मीद होती है। ग्रेटर नोएडा में हमले की शिकार महिला को समय पर इलाज देकर मौत के मुंह से बाहर निकाला गया, तो वहीं जिले के दूसरे छोर पर एम्बुलेंस कर्मियों ने सड़क पर ही सुरक्षित प्रसव कराकर एक नवजात को दुनिया में लाया। दो अलग-अलग घटनाएं, लेकिन एक ही संदेश—अगर सिस्टम संवेदनशील हो, तो हर जान बचाई जा सकती है।
मनीष सिंह, नोएडा। उत्तर प्रदेश की 108 एम्बुलेंस सेवा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि समय पर लिया गया सही फैसला और प्रशिक्षित हाथ मिल जाएं, तो असंभव भी संभव हो जाता है। गौतमबुद्ध नगर जिले में सामने आई दो अलग-अलग लेकिन दिल को छू लेने वाली घटनाओं ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की अहमियत को उजागर कर दिया है। एक ओर जहां हमले की शिकार महिला को मौत के मुंह से निकालकर जीवनदान दिया गया, वहीं दूसरी ओर एम्बुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराकर एक नवजात को नई जिंदगी दी गई। इन दोनों घटनाओं में कुल तीन जिंदगियां सुरक्षित रहीं।
हमले की शिकार महिला के लिए 108 बनी संजीवनी
ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा क्षेत्र में रहने वाली 33 वर्षीय महिला सोमवार को शारीरिक हमले का शिकार हो गई। हमले के बाद महिला की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। घबराए परिजनों ने बिना समय गंवाए 108 एम्बुलेंस सेवा पर कॉल किया। सूचना मिलते ही UP32 EG 4783 नंबर की एम्बुलेंस कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गई। एम्बुलेंस में तैनात EMT सतेंद्र कुमार ने पूरी संवेदनशीलता और पेशेवर कौशल के साथ महिला का प्राथमिक उपचार शुरू किया। दर्द से कराहती महिला को न सिर्फ मानसिक संबल दिया गया, बल्कि उसकी स्थिति को स्थिर रखते हुए सुरक्षित रूप से रबूपुरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पहुंचाया गया। PHC में मौजूद ERCP डॉक्टर प्रेमचंद्र ने तत्काल मेडिकल हस्तक्षेप करते हुए आवश्यक दवाएं और डायक्लोफेनाक इंजेक्शन दिया। समय पर इलाज और एम्बुलेंस स्टाफ की सतर्कता से महिला की जान बचाई जा सकी। डॉक्टरों के अनुसार, यदि कुछ मिनट की भी देरी होती, तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी।
सड़क पर थमी एम्बुलेंस, लेकिन थमी नहीं जिंदगी
दूसरी घटना गौतमबुद्ध नगर जिले के हैबतपुर, विशरख क्षेत्र की है, जहां 21 वर्षीय अंजली पत्नी प्रशांत कुमार को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस को कॉल किया। एम्बुलेंस महिला को अस्पताल ले जा रही थी, लेकिन रास्ते में ही प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए एम्बुलेंस में तैनात EMT जगपाल, पायलट विकास और परिजनों ने साहसिक फैसला लिया। सड़क किनारे एम्बुलेंस को रोककर, सभी मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए वहीं सुरक्षित प्रसव कराया गया। कुछ ही देर में एम्बुलेंस में एक स्वस्थ पुत्र का जन्म हुआ और किलकारी गूंज उठी। इसके बाद मां और नवजात को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिसरख ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया।
108 सेवा की हर तरफ सराहना
इन दोनों घटनाओं के बाद स्थानीय नागरिकों, परिजनों और स्वास्थ्य विभाग में खुशी और गर्व का माहौल है। लोगों ने खुले दिल से 108 एम्बुलेंस सेवा की तारीफ की और कर्मचारियों को “असल ज़िंदगी के हीरो” बताया। जिला एम्बुलेंस प्रभारी सत्यवीर सिंह ने कहा कि यह सफलता टीमवर्क, प्रशिक्षण और संवेदनशीलता का परिणाम है। वहीं जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि 108 एम्बुलेंस स्टाफ पहले भी कई जटिल परिस्थितियों में सुरक्षित प्रसव और जीवनरक्षक उपचार कर चुका है। ऑपरेशन हेड रोचक चौहान, जिला प्रोग्राम मैनेजर शेखर और वरिष्ठ EMT सतवीर ने उत्कृष्ट कार्य के लिए एम्बुलेंस कर्मियों की प्रशंसा करते हुए उन्हें सम्मानित किए जाने की घोषणा की।
जब सिस्टम काम करता है, तब भरोसा जीतता है
गौतमबुद्ध नगर की ये दोनों घटनाएं सिर्फ खबर नहीं, बल्कि एक संदेश हैं—कि यदि आपातकालीन सेवाएं मजबूत हों, तो आम आदमी को आख़िरी समय में भी भरोसा मिलता है। 108 एम्बुलेंस सेवा ने यह साबित कर दिया कि यह सिर्फ एक हेल्पलाइन नहीं, बल्कि जीवन रेखा है। आज जब स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठते हैं, ऐसे में ये कहानियां उम्मीद जगाती हैं—कि कहीं न कहीं सिस्टम अभी भी इंसानियत के साथ काम कर रहा है।