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बरेली। गणतंत्र दिवस के दिन इस्तीफ़ा देकर सुर्खियों में आए बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को शासन ने सस्पेंड कर दिया है। शासनादेश के मुताबिक उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं, जिसकी जिम्मेदारी बरेली मंडल के आयुक्त को सौंपी गई है। आधी रात को सरकारी आवास खाली करने, समर्थकों की भीड़ और ‘जय शिवा–जय भवानी’ के नारों के बीच यह मामला अब प्रशासनिक अनुशासन से निकलकर सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।

गणतंत्र दिवस पर इस्तीफ़ा, फिर निलंबन की कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गणतंत्र दिवस के दिन इस्तीफ़ा देने के कुछ ही घंटों बाद शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया। शासनादेश में साफ कहा गया है कि सिटी मजिस्ट्रेट रहते हुए उनके कृत्य उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली–1999 के अंतर्गत विभागीय अनुशासनहीनता की श्रेणी में आते हैं।

मंडलायुक्त करेंगे विभागीय जांच

शासन ने इस पूरे प्रकरण की जांच बरेली मंडल के आयुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी को सौंपी है। आदेश में उल्लेख है कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं, इसलिए तत्काल निलंबन आवश्यक समझा गया। निलंबन अवधि के दौरान अलंकार अग्निहोत्री को केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, अन्य किसी भत्ते के वे हकदार नहीं होंगे।

आधी रात को खाली किया सरकारी आवास

शासन की कार्रवाई के बाद घटनाक्रम ने और नाटकीय मोड़ ले लिया। रात करीब 11 बजे अलंकार अग्निहोत्री ने सिटी मजिस्ट्रेट का सरकारी आवास खाली कर दिया। इस दौरान एडीएम कंपाउंड में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे। समर्थकों ने उनके समर्थन में नारे लगाए और माहौल भावनात्मक हो गया। इसके बाद वे कार से रवाना होकर बरेली में ही अपने परिचितों के यहां ठहर गए।

निलंबन में भी तय हुआ मुख्यालय

शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान अलंकार अग्निहोत्री का मुख्यालय शामली रहेगा। वे बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। इसे प्रशासनिक सख्ती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

डीएम आवास पर वार्ता और बंधक बनाने का आरोप

इस्तीफ़ा देने के बाद शाम करीब साढ़े सात बजे अलंकार अग्निहोत्री जिलाधिकारी अविनाश सिंह के आवास पर बातचीत के लिए पहुंचे थे। बातचीत के बाद बाहर निकलते ही उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाए कि उन्हें करीब 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया, लखनऊ से फोन आए और उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार, तथ्यहीन और भ्रामक बताया है।

UGC नियम और शंकराचार्य प्रकरण बना विवाद की जड़

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफ़े की वजह यूजीसी के नए नियमों और प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से कथित मारपीट को बताया। उन्होंने इसे सनातन, ब्राह्मण समाज और साधु-संतों के सम्मान से जोड़ते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।

सड़कों पर उतरा समर्थन

इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कई ब्राह्मण संगठनों ने भी खुलकर अलंकार अग्निहोत्री का समर्थन किया। बरेली में प्रदर्शन हुए और इसे वैचारिक संघर्ष का रूप देने की कोशिश की गई। वहीं प्रशासन का कहना है कि मामला पूरी तरह से सेवा नियमों और अनुशासन से जुड़ा है।

शासनादेश के प्रमुख बिंदु

  • प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए तत्काल निलंबन
  • बरेली मंडलायुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त
  • निलंबन अवधि में केवल जीवन निर्वाह भत्ता
  • मुख्यालय शामली निर्धारित
  • नियमावली-1999 के तहत आरोप पत्र की तैयारी

प्रशासन बनाम भावनाएं

एक तरफ शासन इसे प्रशासनिक अनुशासन और मर्यादा का मामला बता रहा है, तो दूसरी ओर समर्थक इसे विचारधारा, आस्था और समाज के अपमान से जोड़ रहे हैं। इस्तीफ़ा, निलंबन, जांच और सड़कों पर उतरा समर्थन—इस पूरे घटनाक्रम ने बरेली से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ा दी है।

बड़ा सवाल

क्या यह मामला केवल एक अफसर के आचरण तक सीमित है, या फिर यह सत्ता, सिस्टम और संवेदनाओं के टकराव का प्रतीक बन चुका है? आने वाली जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि इस प्रकरण में प्रशासनिक अनुशासन भारी पड़ेगा या भावनात्मक समर्थन।

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