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रूस में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बश्कोर्तोस्तान गणराज्य की एक मेडिकल यूनिवर्सिटी में चार भारतीय छात्रों पर हुए हिंसक हमले के बाद अखिल भारतीय मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गहरी चिंता जताई है। संगठन ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए भारत सरकार से तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप और विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

विदेशों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। रूस के बश्कोर्तोस्तान गणराज्य में स्थित एक स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में हुए हिंसक हमले ने न केवल छात्रों और उनके परिजनों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि भारत सरकार और संबंधित संस्थाओं के सामने भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में चार भारतीय मेडिकल छात्रों समेत कुल छह लोग घायल हुए हैं। इस गंभीर मामले को लेकर अखिल भारतीय मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने पत्र में कहा है कि इस तरह की घटनाएं विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए असुरक्षा का माहौल पैदा कर रही हैं और इन पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स और भारतीय मिशन से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना रूस के बश्कोर्तोस्तान गणराज्य की राजधानी उफा में स्थित एक स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्रावास में हुई। शनिवार को चाकू लिए एक किशोर हॉस्टल परिसर में घुस आया और वहां मौजूद छात्रों पर हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले में चार भारतीय मेडिकल छात्र घायल हो गए, जबकि कुल घायलों की संख्या कम से कम छह बताई जा रही है। हमले के बाद हॉस्टल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और छात्रों में दहशत का माहौल बन गया।

AIMSA ने क्यों लिखा पीएम को पत्र?

अखिल भारतीय मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताया है। पीएम मोदी को लिखे गए पत्र में AIMSA ने कहा कि इस तरह की हिंसक घटनाएं न केवल छात्रों की शारीरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें असुरक्षित महसूस कराती हैं। संगठन का कहना है कि हजारों भारतीय छात्र बेहतर शिक्षा की उम्मीद में विदेशों का रुख करते हैं, लेकिन अगर वहां उनकी सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं होगी तो यह बेहद गंभीर स्थिति है।

AIMSA की भारत सरकार से 4 बड़ी मांगें

AIMSA ने अपने पत्र में भारत सरकार के सामने चार अहम मांगें रखी हैं—

  • पहली मांग: पीड़ित भारतीय छात्रों को न्याय दिलाने के लिए रूस सरकार के साथ तुरंत कूटनीतिक पहल की जाए और इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराई जाए।
  • दूसरी मांग: विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और सहायता तंत्र को और मजबूत किया जाए, ताकि संकट की स्थिति में उन्हें तुरंत मदद मिल सके।
  • तीसरी मांग: खतरे या भेदभाव का सामना कर रहे भारतीय छात्रों के लिए स्पष्ट एडवाइजरी जारी की जाए और 24×7 आपातकालीन हेल्पलाइन की व्यवस्था की जाए।
  • चौथी मांग: विदेशी विश्वविद्यालयों और स्थानीय सरकारों के साथ समन्वय बढ़ाकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

भारतीय दूतावास हुआ सक्रिय

घटना के बाद मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। दूतावास ने अपने बयान में कहा कि चार भारतीय छात्रों सहित कई लोग इस हमले में घायल हुए हैं और भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में है। इसके साथ ही कजान स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों को उफा भेजा गया है, ताकि घायल छात्रों को हर संभव सहायता प्रदान की जा सके। दूतावास ने भरोसा दिलाया है कि भारत सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।

छात्रों और परिजनों में बढ़ी चिंता

इस घटना के बाद न केवल रूस में पढ़ रहे भारतीय छात्र डरे हुए हैं, बल्कि भारत में उनके परिजनों की चिंता भी बढ़ गई है। छात्रों का कहना है कि हॉस्टल और कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर अब सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर चिंता और नाराजगी देखी जा रही है। कई लोग सरकार से विदेशों में भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर ठोस नीति बनाने की मांग कर रहे हैं।

विदेश में पढ़ रहे छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या विदेशों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से मजबूत सुरक्षा और सहायता तंत्र विकसित करना जरूरी है। AIMSA का यह पत्र इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो सरकार का ध्यान छात्रों की वास्तविक समस्याओं की ओर खींचता है।

आगे क्या?

अब सभी की निगाहें भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मामले में रूस के साथ किस तरह का कूटनीतिक कदम उठाती है और भविष्य में भारतीय छात्रों की सुरक्षा के लिए कौन-से ठोस फैसले लिए जाते हैं। फिलहाल घायल छात्रों का इलाज जारी है और भारतीय मिशन की ओर से उन्हें हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया गया है।

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