जुमे की नमाज में उमड़ी भीड़, हुमायूं कबीर बोले – अब मुसलमान ही बनाएंगे सरकार
कोलकाता, पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने ‘जनता उन्नयन पार्टी’ (JUP) के नाम से नई पार्टी बना ली है — और इसी के साथ उन्होंने ममता बनर्जी के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। शुक्रवार के जुमे की नमाज के दिन मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में जबरदस्त भीड़ उमड़ी। बाबरी मस्जिद के भावनात्मक मुद्दे पर हुमायूं कबीर की अपील पर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। जहां नमाज के बाद उन्होंने एलान किया – “अब मुसलमान वोटर सिर्फ किंग-मेकर नहीं, खुद किंग बनेगा।”
अब मुसलमान वोटर खुद किंग बनेगा
नमाज के बाद भीड़ को संबोधित करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि अब तक 2.5 करोड़ मुसलमान वोटर ममता बनर्जी को सत्ता तक पहुंचाते रहे, लेकिन इसके बदले उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिला। उन्होंने कहा, हमने वोट देकर दूसरों को राजा बनाया, अब वक्त है कि मुसलमान खुद अपना राज बनाए। यह बयान न सिर्फ भीड़ में जोश भर गया, बल्कि बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि हुमायूं कबीर का यह कहा-सुना ममता सरकार के लिए आने वाले दिनों में सिरदर्द बना रहेगा।
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- जुमे की नमाज में उमड़ी भीड़, हुमायूं कबीर बोले – अब मुसलमान ही बनाएंगे सरकार
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- ईंटों से खड़ी हो रही नई राजनीति, ममता के लिए सिरदर्द बने हुमायूं कबीर
बाबरी मस्जिद के नाम पर बढ़ी सियासी गर्मी
रैली स्थल पर हुमायूं कबीर ने ‘मस्जिद निर्माण के लिए ईंट दान अभियान’ शुरू किया। यहां लगाए गए स्टॉलों पर श्रद्धालु 10 रुपये में ईंट खरीदकर दान दे रहे थे। कई जगह QR कोड भी लगाए गए ताकि लोग ऑनलाइन दान कर सकें। लाउडस्पीकरों से बार-बार आवाज गूंज रही थी —मस्जिद भी बनेगी और नई सियासत भी। सोशल मीडिया पर इस रैली की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों को मस्जिद निर्माण के लिए ईंटें खरीदते देखा गया। यह पूरा आयोजन धार्मिक भावना और राजनीतिक रणनीति का अनोखा संगम बन गया।
ममता बनर्जी की बढ़ी चिंता
तृणमूल कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी नजर रखी हुई है। राज्य के अल्पसंख्यक इलाकों में हुमायूं कबीर का असर सीमित जरूर है, लेकिन मुसलमान वोट बैंक पर उनकी सक्रिय दावेदारी ममता सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई है। माना जा रहा है कि अगर हुमायूं कबीर ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और ISF के नेता नौशाद सिद्दीकी के साथ गठबंधन किया, तो इसका 70 से अधिक सीटों पर सीधा असर पड़ सकता है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह गठजोड़ यदि बनता है, तो बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं।
हमारी आवाज अब कोई नहीं दबा सकेगा
भीड़ के सामने हुमायूं कबीर ने कहा, “हमने सालों तक ममता बनर्जी पर भरोसा किया। अब वक्त है कि मुसलमान अपनी आवाज खुद उठाए। हमारी तरक्की हमारी अपनी पार्टी से होगी। उन्होंने टीएमसी सरकार पर अल्पसंख्यकों की अनदेखी का आरोप लगाया और कहा कि उनकी पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ मुसलमानों की वास्तविक समस्याओं पर फोकस करेगी — शिक्षा, रोज़गार और सम्मान।
ईंट से ईंट जोड़कर नई सियासत बनाएंगे
कबीर का यह करिश्माई भाषण किसी धार्मिक सभा से बढ़कर एक राजनीतिक लहर में बदल गया। हजारों लोगों ने नमाज के बाद ईंटें खरीदीं, और कबीर के समर्थक नारों से आसमान गूंजा —मुसलमान अब खुद अपना नेता बनाएगा। उनकी इस नई पार्टी की लॉन्चिंग के साथ ही यह बाबरी मस्जिद का मुद्दा बंगाल की राजनीति में फिर से चर्चाओं का केंद्र बन गया। कबीर के समर्थकों का दावा है कि आने वाले महीनों में बंगाल के कई मुस्लिम नेता एक मंच पर जुटेंगे।
बंगाल की राजनीति में नया मोड़
हुमायूं कबीर का यह अभियान फिलहाल मुर्शिदाबाद और नदिया तक ही सीमित है, लेकिन राजनीतिक जानकारों की राय है कि उन्होंने धार्मिक भावना को राजनीतिक मौका बनाने की तैयारी कर ली है। बाबरी मस्जिद जैसे प्रतीकात्मक मुद्दे के ज़रिए कबीर ने एक मजबूत भावनात्मक कनेक्शन बना लिया है। और यही ममता बनर्जी की चिंता का सबसे बड़ा कारण है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, देखना यह होगा कि यह भीड़ वोटों में तब्दील होती है या ममता अपने पुराने वोट बैंक को बचाने में कामयाब रहती हैं।