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हज यात्रा 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए एक ऐतिहासिक और हाईटेक पहल की है। इस बार भारत से हज पर जाने वाले करीब 1.25 लाख जायरीनों को हाथ में पहनने वाला एक विशेष स्मार्ट बैंड दिया जाएगा, जिसमें आपातकालीन बटन मौजूद होगा। इस बटन को दबाते ही संबंधित प्राधिकारी तुरंत यात्री की लोकेशन और स्थिति जान सकेंगे। उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने इस नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार डिजिटल तकनीक और AI के जरिए हज यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बना रही है।

हज 2026: यात्रियों की सुरक्षा में डिजिटल क्रांति

हज यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि करोड़ों मुसलमानों के लिए आस्था, विश्वास और जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सपना होती है। हर साल लाखों लोग दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से सऊदी अरब के मक्का-मदीना पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने हज 2026 के लिए एक अत्याधुनिक और तकनीक-आधारित व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।

हर हज यात्री के हाथ में होगा ‘सुरक्षा कवच’

उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने बताया कि इस साल हज यात्रियों को एक विशेष स्मार्ट बैंड दिया जाएगा, जिसे वे अपने हाथ में पहनेंगे। इस बैंड में एक आपातकालीन (Emergency) बटन लगा होगा। किसी भी आपात स्थिति—जैसे तबीयत बिगड़ना, रास्ता भटक जाना, भीड़ में फंस जाना या कोई अन्य खतरा—में यात्री सिर्फ एक बटन दबाकर मदद मांग सकेंगे।

बटन दबाते ही सक्रिय होगी सुरक्षा टीम

आपातकालीन बटन दबाते ही संबंधित कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिलेगा। इस बैंड के जरिए यात्री की रियल-टाइम लोकेशन, पहचान और स्थिति की जानकारी प्रशासन तक पहुंच जाएगी। इसके बाद नजदीकी सहायता दल, मेडिकल टीम या सुरक्षा कर्मी तुरंत उस यात्री तक पहुंच सकेंगे। इससे समय पर मदद मिलना संभव होगा और बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सकेगा।

AI और डिजिटल तकनीक से होगी निगरानी

दानिश आजाद अंसारी ने बताया कि मोदी सरकार डिजिटल उपकरणों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर हज यात्रा को और सुरक्षित व सुव्यवस्थित बना रही है। इस तकनीक के जरिए भीड़ प्रबंधन, यात्री निगरानी और आपात स्थितियों पर तेज़ प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि हर हज यात्री खुद को सुरक्षित और भरोसेमंद व्यवस्था के बीच महसूस करे।

1.25 लाख भारतीय जाएंगे हज यात्रा पर

सरकारी अनुमान के मुताबिक वर्ष 2026 में भारत से करीब 1.25 लाख लोग हज यात्रा पर जा सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को संभालने के लिए मजबूत प्रबंधन व्यवस्था बेहद जरूरी है। वर्तमान में हर 150 जायरीनों पर एक हज इंस्पेक्टर की तैनाती होती है, लेकिन नई तकनीक के आने से निगरानी और अधिक प्रभावी हो जाएगी।

उच्च स्तरीय समिति का गठन

हज यात्रियों की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसकी अगुवाई खुद दानिश आजाद अंसारी कर रहे हैं। इस समिति का उद्देश्य हज यात्रा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान निकालना और यात्रियों को अधिकतम सुविधा देना है।

मक्का जाकर की गई व्यवस्था की समीक्षा

अंसारी ने बताया कि उन्होंने हाल ही में विदेश मंत्रालय और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों के साथ सऊदी अरब के मक्का का दौरा किया। वहां उन्होंने हज 2026 की तैयारियों, आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि भारतीय हज यात्रियों को किसी भी स्तर पर परेशानी न हो।

मोदी सरकार की प्राथमिकता: सुरक्षित और सुगम हज यात्रा

राज्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की प्राथमिकता है कि हज यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और सम्मानजनक व्यवस्था मिले। पिछले कुछ वर्षों में हज यात्रा के खर्च, सुविधाओं और पारदर्शिता में कई अहम सुधार किए गए हैं। इमरजेंसी बटन वाला स्मार्ट बैंड इसी दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम माना जा रहा है।

भविष्य की हज यात्रा होगी और भी स्मार्ट

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हज यात्रा पूरी तरह डिजिटल और स्मार्ट हो सकती है। GPS ट्रैकिंग, हेल्थ मॉनिटरिंग, डिजिटल पहचान और AI-आधारित सुरक्षा जैसी तकनीकें यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाएंगी।

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