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उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। दिल्ली से कानपुर जा रही एक बस से टॉयलेट के लिए उतरे सात यात्रियों को तेज रफ्तार कंटेनर ने कुचल दिया। इस दर्दनाक हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक यात्री गंभीर रूप से घायल है। हादसा थाना सुरीर क्षेत्र में तड़के करीब पौने तीन बजे हुआ।

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित यमुना एक्सप्रेसवे एक बार फिर रफ्तार और लापरवाही का गवाह बना। गुरुवार तड़के हुए इस भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा उस वक्त हुआ जब दिल्ली से कानपुर जा रही एक बस के यात्री टॉयलेट के लिए सड़क किनारे उतरे थे। यह दुर्घटना थाना सुरीर क्षेत्र के यमुना एक्सप्रेसवे माइलस्टोन 88 के पास सुबह करीब 2:45 बजे हुई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और कुछ ही पलों में खुशियों से भरा सफर मातम में बदल गया।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के नांगलोई से कानपुर के रसूलाबाद जा रही निजी बस में सवार कुछ यात्रियों ने टॉयलेट जाने की जरूरत बताकर ड्राइवर से बस रोकने को कहा। बस चालक ने ग्रीन जोन या निर्धारित पार्किंग स्थल पर बस न रोकते हुए, एक्सप्रेसवे के किनारे ही बस खड़ी कर दी। यात्री जैसे ही बस से नीचे उतरे, तभी पीछे से आ रहा एक तेज रफ्तार कंटेनर अनियंत्रित हो गया। कंटेनर ने पहले बस को जोरदार टक्कर मारी और फिर सड़क पर खड़े यात्रियों को अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कंटेनर की रफ्तार इतनी अधिक थी कि चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और पल भर में यह हादसा हो गया।

तेज रफ्तार और लापरवाही बनी वजह

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कंटेनर बहुत तेज गति में था। अंधेरा, हाईवे पर अचानक खड़ी बस और चालक की लापरवाही—इन सभी कारणों ने मिलकर इस दर्दनाक हादसे को जन्म दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बस चालक ने नियमों का पालन करते हुए बस को निर्धारित स्थान पर रोका होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था।

इन लोगों की गई जान

हादसे के बाद मौके पर ही छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है—

  • सोनू, निवासी सरवा कटरा, औरैया
  • देवेश, निवासी अलेवल, बस्ती
  • अस्लम, निवासी गणेश का पुरवा, कन्नौज
  • संतोष, निवासी प्रेम नगर, दिल्ली
  • दो अन्य यात्रियों की पहचान की प्रक्रिया जारी
  • वहीं, अमर दुबे, निवासी बेला, औरैया गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

हादसे की सूचना मिलते ही सुरीर थाना पुलिस, यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी और एंबुलेंस टीम मौके पर पहुंची। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया और मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।पुलिस ने कंटेनर चालक को हिरासत में ले लिया है और उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

परिजनों में मचा कोहराम

जैसे ही हादसे की खबर मृतकों के परिजनों तक पहुंची, घरों में कोहराम मच गया। परिजन बदहवास हालत में मथुरा पहुंचे। कई परिवारों के लिए यह सफर आखिरी साबित हुआ, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर अक्सर तेज रफ्तार वाहन बिना नियमों की परवाह किए दौड़ते हैं, जिससे ऐसे हादसे होते रहते हैं।

यमुना एक्सप्रेसवे: हादसों का हॉटस्पॉट?

यमुना एक्सप्रेसवे पर यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते एक महीने में यहां कई बड़े हादसे हो चुके हैं—22 जनवरी को माइलस्टोन 110 के पास एक स्लीपर कोच बस में अचानक आग लग गई थी। बस में 60 से ज्यादा यात्री सवार थे, जो किसी तरह जान बचाने में सफल रहे। 28 जनवरी को घने कोहरे के चलते 7 बसें और 3 कारें आपस में टकरा गई थीं, जिसमें 4 लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं ने एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवालों के घेरे में सुरक्षा इंतजाम

  • लगातार हो रहे हादसों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि—
  • क्या एक्सप्रेसवे पर रफ्तार नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम हैं?
  • क्या बस चालकों को नियमों की सख्ती से ट्रेनिंग दी जा रही है?
  • क्या रात के समय निगरानी पर्याप्त है

विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर रात के समय अनधिकृत ठहराव और तेज रफ्तार सबसे बड़े खतरे बन चुके हैं। मथुरा का यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की चूक और लापरवाही का परिणाम है। कुछ मिनटों की जल्दबाजी और नियमों की अनदेखी ने छह परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। जरूरत है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा नियमों को और सख्ती से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।

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