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कन्नौज: DM ऑफिस में छलका बुजुर्गों का दर्द, हाथ में था ‘इच्छामृत्यु’ का पोस्टर

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने रिश्तों की सच्चाई और समाज की संवेदनशीलता—दोनों को झकझोर दिया है। यहां एक बुजुर्ग पति-पत्नी हाथ में ‘इच्छामृत्यु’ का पोस्टर लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे। उनकी आंखों में आंसू थे और चेहरे पर डर… वो बार-बार यही कह रहे थे—“हमें अपने बेटे से जान का खतरा है… हमें बचा लो।”

चलने में असमर्थ दंपति फिर भी पहुंचे ‘दरबार’, बोले- अब जीने नहीं दे रहा बेटा

कन्नौज के हसेरन क्षेत्र के ग्राम भूड़पूर्वा निवासी करीब 80 वर्षीय बाबूराम अपनी पत्नी कमलेश कुमारी के साथ डीएम कार्यालय पहुंचे। उम्र इतनी कि चलना मुश्किल, शरीर कमजोर, लेकिन दर्द इतना बड़ा कि खुद को घसीटते हुए भी न्याय मांगने निकल पड़े। बुजुर्ग दंपति का कहना है कि घर में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि अब उन्हें हर दिन डर के साए में जीना पड़ता है।

‘जिस बेटे को कर्ज लेकर पढ़ाया… वही जमीन के लिए दुश्मन बन गया’

बुजुर्ग बाबूराम ने रोते हुए बताया कि उनका सबसे छोटा बेटा देवेंद्र, सिद्धार्थनगर जिले में लेखपाल के पद पर तैनात है। पिता का आरोप है कि बेटे का मकसद अब सिर्फ एक ही रह गया है—जमीन पर कब्जा। उन्होंने कहा— “हमने कर्ज लेकर उसे पढ़ाया-लिखाया, नौकरी लगवाई… जिस बेटे के लिए जिंदगी लगा दी, आज वही बेटे ने हमारी जिंदगी छीन ली।”

30 बीघा से ज्यादा जमीन पर नज़र, रोज़ मारपीट का आरोप

दंपति का आरोप है कि उनका बेटा 30 बीघा से ज्यादा जमीन अपने नाम कराने के लिए दबाव बना रहा है। वह आए दिन विवाद करता है और मारपीट तक करता है। बुजुर्ग का कहना है कि वह जमीन उनके जीवनभर की कमाई है—जिसके सहारे उनके बुढ़ापे की सांसें चलनी थीं। लेकिन अब वही जमीन उनके लिए मौत का कारण बनती जा रही है।

रोते हुए बोले- “हमने इच्छा मृत्यु इसलिए मांगी क्योंकि अब बचने का रास्ता नहीं दिखता”

DM ऑफिस में बुजुर्ग पति-पत्नी की हालत देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। पति ने कांपती आवाज में कहा—
“हमारा जीना मुश्किल कर दिया है… बेटा घर में चैन से रहने नहीं देता… इसलिए हम इच्छामृत्यु मांगने आए हैं।”
उनकी पत्नी भी फूट-फूटकर रोती रही। वह बस यही कहती रही— “हमने उसे मां की तरह पाला… आज वही हमें खत्म करना चाहता है।”

घर की दीवारों के भीतर डर का माहौल, ‘अपनों’ से ही खतरा

यह मामला केवल जमीन या संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटते भरोसे की कहानी भी है। अक्सर लोग कहते हैं—“बुढ़ापे की लाठी बेटा होता है” लेकिन इस घटना में बेटा ही बुजुर्गों के लिए डर का कारण बन गया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब घर ही सुरक्षित नहीं रहा, तो इंसान जाए कहां?

DM ने दिया भरोसा- होगी जांच, मिलेगी मदद

इस मामले में डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने बुजुर्ग दंपति को जांच और मदद का भरोसा दिया है।
बताया गया कि प्रशासन की तरफ से मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि बुजुर्गों की मांग सिर्फ एक है—सुरक्षा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार।

समाज के सामने बड़ा सवाल: क्या नौकरी और पद रिश्तों से बड़ा हो गया?

यह घटना इसलिए भी सनसनीखेज़ है क्योंकि आरोपी बेटा सरकारी नौकरी में है और लेखपाल जैसे पद पर तैनात है।
ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि—

  • क्या सरकारी नौकरी इंसान को जिम्मेदार बनाती है या अहंकारी?
  • क्या जमीन की भूख रिश्तों को निगल रही है?
  • क्या मां-बाप अब सिर्फ “प्रॉपर्टी” बनकर रह गए हैं?

आज के दौर में संपत्ति विवादों के मामले बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन जब बात माता-पिता की सुरक्षा की हो, तो मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि मानवीय संकट बन जाता है।

बुजुर्गों की गुहार: “हमें हमारा घर और जमीन सुरक्षित चाहिए”

बुजुर्ग दंपति ने प्रशासन से साफ मांग की है कि उन्हें सुरक्षा दी जाए और उनकी जमीन पर जबरन कब्जे की कोशिश रोकी जाए। उनका कहना है कि वे जीवन के अंतिम पड़ाव में हैं और शांति से जीना चाहते हैं। लेकिन बेटे के दबाव और मारपीट से उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।

रिश्तों की सबसे दर्दनाक तस्वीर: मां-बाप ने बेटे को नहीं, सिस्टम को पुकारा

इस खबर की सबसे भावुक और चौंकाने वाली बात यह है कि माता-पिता को अपने ही बेटे से बचने के लिए डीएम कार्यालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जहां आमतौर पर लोग सड़क, बिजली और पानी की शिकायत लेकर आते हैं—वहीं यहां एक बुजुर्ग दंपति अपनी जान बचाने की भीख मांग रहा था। उनके हाथ में था ‘इच्छामृत्यु’ का पोस्टर… लेकिन असल में वो मौत नहीं, इंसाफ मांग रहे थे।

अब निगाहें प्रशासन पर—क्या बुजुर्गों को मिलेगा इंसाफ?

अब सवाल यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है। बुजुर्ग दंपति की मांग कोई बड़ी नहीं—बस इतना कि उन्हें जीने दिया जाए। यह कहानी हर उस परिवार के लिए चेतावनी है, जहां संपत्ति रिश्तों से ऊपर होने लगी है।
क्योंकि जब माता-पिता को ‘इच्छामृत्यु’ मांगनी पड़े… तो समझिए समाज भीतर से टूट रहा है।

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