ग्रेटर नोएडा से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और अकेलेपन के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ईकोटेक-3 थाना क्षेत्र में रहने वाली एक 30 वर्षीय युवती ने सुसाइड नोट लिखने के बाद पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में लिखे शब्द—“महादेव, मेरी जिंदगी में अब बचा ही क्या है”—ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।
ग्रेटर नोएडा: जीवन अनमोल है, यह बात हर कोई जानता है, लेकिन जब मन के भीतर का दर्द असहनीय हो जाता है, तब कुछ लोग ऐसा कदम उठा लेते हैं, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक-3 थाना क्षेत्र में सामने आई एक घटना ने समाज को फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहां एक युवती ने पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। मौके से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने लिखा— “महादेव, मेरी जिंदगी में अब बचा ही क्या है। मैं अब जीना नहीं चाहती। मेरी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए।” इन शब्दों ने न केवल पुलिस बल्कि परिजनों और स्थानीय लोगों को भी भीतर तक झकझोर दिया।
कौन थी मृतका?
मृतका की पहचान बरखा सिंह (30 वर्ष) के रूप में हुई है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के खोजी गांव की रहने वाली थी। बरखा बचपन से ही ग्रेटर नोएडा के जलपुरा गांव स्थित ट्विंस बिल्डिंग में अपनी नानी के साथ रह रही थी|परिवार की पृष्ठभूमि भी काफी भावनात्मक रही है। बरखा की मां का देहांत उसके बचपन में ही हो गया था, जबकि उसके पिता उससे अलग रहते हैं। ऐसे में नानी ही उसकी सबसे बड़ी सहारा और अभिभावक थीं, जिन्होंने उसे पढ़ाया-लिखाया और आगे बढ़ने का हौसला दिया।
गुरुवार रात की दर्दनाक घटना
घटना गुरुवार रात करीब 8:30 बजे की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बरखा अपने फ्लैट की छत पर गई और कुछ ही पलों बाद उसने पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी। गिरते ही उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही ईकोटेक-3 थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और आसपास के लोगों से पूछताछ की गई।
सुसाइड नोट में छलका दर्द
पुलिस को मृतका के कमरे से जो सुसाइड नोट मिला, उसने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया। नोट में बरखा ने साफ तौर पर लिखा कि वह अब जीना नहीं चाहती और उसकी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सुसाइड नोट से यह साफ संकेत मिलता है कि युवती अंदरूनी मानसिक संघर्ष से गुजर रही थी और खुद को बेहद अकेला महसूस कर रही थी।
मानसिक तनाव से जूझ रही थी युवती
प्रारंभिक जांच और परिजनों से बातचीत में यह बात सामने आई है कि बरखा पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव और अवसाद में थी। उसका सपना एक मेकअप आर्टिस्ट बनने का था। इसके लिए वह लगातार प्रयास भी कर रही थी, लेकिन निजी कारणों, करियर में अनिश्चितता और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते वह खुद को असफल मानने लगी थी। नानी ने पुलिस को बताया कि बरखा अक्सर चुप-चुप रहने लगी थी और कई बार भावुक हो जाया करती थी। हालांकि, उसने कभी खुलकर अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं की।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
ईकोटेक-3 थाना पुलिस का कहना है कि फिलहाल इस मामले में कोई सुसाइड के लिए उकसाने का आरोप सामने नहीं आया है। परिजनों की ओर से भी अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है—
मोबाइल फोन की कॉल डिटेल
सोशल मीडिया गतिविधि
हालिया व्यवहार और बातचीत
ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं किसी तरह का दबाव या अन्य कारण तो नहीं था।
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना केवल एक आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। आज के दौर में युवा वर्ग करियर, रिश्तों और भविष्य को लेकर भारी दबाव में जी रहा है। मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात न होना और मदद न मांग पाना कई बार जानलेवा साबित हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिप्रेशन कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक बीमारी है, जिसका इलाज संभव है—बस जरूरत है समय पर संवाद और सहयोग की।