केंद्रीय बजट 2026 देश की अर्थव्यवस्था के लिए सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकार की दीर्घकालिक सोच और प्राथमिकताओं का स्पष्ट रोडमैप बनकर सामने आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में लगातार नौवीं बार बजट पेश करते हुए साफ किया कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की आर्थिक मजबूती तीन मूल कर्तव्यों पर आधारित है। आम नागरिकों की आकांक्षाओं, समावेशी विकास और स्थिर आर्थिक वृद्धि को केंद्र में रखकर पेश किया गया बजट 2026 आने वाले वर्षों की दिशा तय करता नजर आ रहा है।
Budget 2026: तीन कर्तव्यों पर केंद्रित सरकार की नई आर्थिक सोच
रविवार को संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार की नीतियों को स्पष्ट शब्दों में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद स्थिरता, वित्तीय अनुशासन और सतत विकास का रास्ता अपनाया है। बजट 2026 इसी सोच की अगली कड़ी है, जिसमें सरकार ने तीन कर्तव्यों को अपनी प्राथमिकता बताया है।
पहला कर्तव्य: वैश्विक अस्थिरता में भी विकास की रफ्तार बनाए रखना
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में स्वीकार किया कि आज दुनिया व्यापार युद्धों, भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और संसाधनों की कमी जैसे संकटों से जूझ रही है। ऐसे में भारत का पहला कर्तव्य है कि वह इन चुनौतियों के बीच भी आर्थिक विकास की गति को तेज करे और उसे बनाए रखे। सरकार का दावा है कि आत्मनिर्भर भारत की नीति के तहत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक आयात पर निर्भरता कम करने से देश को मजबूती मिली है। यही वजह है कि भारत लगभग 7 प्रतिशत की हाई ग्रोथ रेट हासिल करने में सफल रहा है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है।
दूसरा कर्तव्य: आम लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना
बजट 2026 का दूसरा बड़ा कर्तव्य आम नागरिकों से सीधे जुड़ा है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक आंकड़े सुधारना नहीं, बल्कि लोगों की क्षमताओं को विकसित कर उन्हें देश की समृद्धि का साझेदार बनाना है। रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता बढ़ाने, परिवारों की क्रय शक्ति मजबूत करने और नागरिकों को यूनिवर्सल सेवाएं देने के लिए सरकार ने बीते वर्षों में कई संरचनात्मक सुधार किए हैं। बजट 2026 इन्हीं सुधारों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराता है, ताकि विकास का लाभ सिर्फ चुनिंदा वर्गों तक सीमित न रहे।
तीसरा कर्तव्य: हर वर्ग को संसाधनों और अवसरों तक समान पहुंच
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार का तीसरा कर्तव्य सामाजिक और आर्थिक समावेशन से जुड़ा है। इसके तहत प्रत्येक परिवार, समुदाय, धर्म और क्षेत्र को संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक सार्थक पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। यह कर्तव्य सिर्फ योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प है। बजट 2026 में यही संदेश दिया गया है कि विकास तभी टिकाऊ होगा जब समाज का हर वर्ग उसमें भागीदार बने।
7% ग्रोथ रेट का दावा: सरकार की उपलब्धि या चुनौती?
लोकसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सुधारों और नीतिगत फैसलों की वजह से भारत को लगभग 7 प्रतिशत की हाई ग्रोथ रेट मिली है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन उपायों से गरीबी कम करने और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिली है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस ग्रोथ को बनाए रखना ही असली चुनौती होगी, खासकर तब जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
आत्मनिर्भर भारत और बदलती वैश्विक परिस्थितियां
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में यह भी चेतावनी दी कि आज के दौर में बहुपक्षवाद और व्यापार दोनों खतरे में हैं। नई तकनीकें उत्पादन प्रणालियों को बदल रही हैं, जबकि पानी, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए आत्मनिर्भरता सिर्फ नारा नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। बजट 2026 इसी रणनीति को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
बयानबाजी नहीं, सुधारों का रास्ता
निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार ने बयानबाजी के बजाय सुधारों का मार्ग चुना है। बजट 2026 इस बात का संकेत देता है कि भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ता रहेगा, चाहे वैश्विक हालात कितने ही चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।