बरेली-पीलीभीत रोड पर रोज सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। हाईवे चौड़ीकरण के चलते हो रही परेशानियों के बीच लभेड़ा टोल प्लाजा पर टोल टैक्स में 50 प्रतिशत तक की कटौती कर दी गई है। अब कार चालकों से 70 रुपये की जगह केवल 40 रुपये वसूले जाएंगे। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो चुकी हैं, जिससे दैनिक यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला बोझ काफी कम हो जाएगा।
बरेली-पीलीभीत रोड पर राहत की रफ्तार, आधा हुआ टोल टैक्स
बरेली-पीलीभीत रोड पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए आखिरकार राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से खराब सड़क, डायवर्जन और निर्माण कार्य की वजह से परेशान लोगों को अब टोल शुल्क में बड़ी छूट दी गई है। लभेड़ा टोल प्लाजा पर टोल टैक्स में 50 प्रतिशत तक की कटौती लागू कर दी गई है, जिससे निजी और व्यावसायिक दोनों तरह के वाहन चालकों को सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा। शनिवार से लागू नई दरों के अनुसार अब कार चालकों को 70 रुपये के बजाय केवल 40 रुपये टोल देना होगा। यह फैसला उन यात्रियों के लिए राहत लेकर आया है जो रोजाना इस मार्ग से आवाजाही करते हैं और लंबे समय से अधूरे हाईवे के बावजूद पूरा टोल देने को मजबूर थे।
हाईवे चौड़ीकरण के बीच मिली बड़ी राहत
बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे का चौड़ीकरण कार्य तेजी से चल रहा है। लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना को तैयार किया जा रहा है। पहले चरण में बरेली से पीलीभीत तक करीब 32.50 किलोमीटर सड़क का विस्तार किया जा रहा है, जबकि दूसरे चरण में पीलीभीत से सितारगंज तक लगभग 38 किलोमीटर मार्ग चौड़ा किया जा रहा है। हालांकि निर्माण कार्य के दौरान सड़क की स्थिति कई स्थानों पर चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कहीं संकरी लेन, तो कहीं डायवर्जन और उखड़ी सड़क ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जगह जाम और धीमी रफ्तार आम बात बन चुकी है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने टोल दरों में कटौती का फैसला लिया, ताकि निर्माण अवधि के दौरान लोगों को आर्थिक राहत मिल सके।
अब कौन सा वाहन कितना देगा टोल
नई टोल दरें लागू होने के बाद सभी श्रेणी के वाहनों को फायदा मिला है। संशोधित शुल्क इस प्रकार है —
- कार / निजी चार पहिया वाहन: 70 रुपये से घटाकर 40 रुपये
- व्यावसायिक चार पहिया वाहन: 110 रुपये से घटाकर 65 रुपये
- बस: 240 रुपये से घटाकर 140 रुपये
- तीन एवं छह एक्सल वाहन: 250 रुपये से घटाकर 160 रुपये
इस बदलाव से साफ है कि सिर्फ निजी वाहन ही नहीं बल्कि परिवहन और व्यवसायिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
क्यों घटानी पड़ी टोल दरें?
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार परियोजना का लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन शेष निर्माण कार्य के दौरान सड़क पूरी तरह सुचारु नहीं रह सकती। कई स्थानों पर अस्थायी अवरोध, निर्माण मशीनरी और ट्रैफिक डायवर्जन मौजूद हैं। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए टोल दरों में कटौती का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिलते ही नई दरें लागू कर दी गईं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सड़क पूरी तरह चौड़ी और सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक रियायती दरें लागू रहेंगी।
डिजिटल मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था भी होगी मजबूत
परियोजना के तहत हाईवे पर डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड और निगरानी कैमरे भी लगाए जाने हैं। इससे ट्रैफिक नियंत्रण बेहतर होगा और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रा न सिर्फ तेज बल्कि सुरक्षित भी होगी।
टोल वसूलने वालों की जिम्मेदारी तय
हाईवे पर टोल वसूली करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी सिर्फ शुल्क लेना नहीं बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना भी है। सड़क जब पूरी तरह सुचारु नहीं होती, तब पूर्ण टोल वसूली को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। ऐसे में आधा टोल लेने का फैसला वाहन चालकों के अधिकारों के अनुरूप माना जा रहा है। परियोजना निदेशक नवरत्न ने पुष्टि की है कि मुख्यालय से आदेश जारी हो चुके हैं और नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
रोजाना यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा
बरेली, पीलीभीत और सितारगंज के बीच रोज यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। दैनिक यात्रियों की मासिक बचत अब सैकड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति रोज दो बार टोल पार करता है, तो महीने भर में उसकी अच्छी-खासी रकम बच सकती है। इससे नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को आर्थिक राहत मिलेगी।
जनता की उम्मीद — जल्दी पूरा हो हाईवे
हालांकि टोल में राहत मिलने से लोगों ने संतोष जताया है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि हाईवे चौड़ीकरण का काम जल्द पूरा हो। क्योंकि अधूरी सड़क पर यात्रा अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा हो जाता है, तो यह मार्ग क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा।