बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में स्थित राजेंद्र नगर के ‘दि डेन कैफे एंड रेस्टो’ में शनिवार रात हुआ हंगामा अब एक गंभीर कानूनी और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। कथित ‘लव जिहाद’ के आरोप को लेकर हुए इस बवाल में पुलिस ने बजरंग दल के पांच कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक आरोपी नाबालिग बताया जा रहा है, जिस पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। यह पूरा मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था से जुड़ा है, बल्कि समाज में फैल रही अफवाहों, सांप्रदायिक तनाव और भीड़ के उग्र रूप को भी उजागर करता है।
जन्मदिन की पार्टी से शुरू हुआ विवाद
प्रेमनगर क्षेत्र के एक हॉस्टल में रहने वाली युवती, जो एक निजी कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा है, ने शनिवार को अपने जन्मदिन के अवसर पर दोस्तों के साथ पार्टी का आयोजन किया था। यह पार्टी दि डेन कैफे में रखी गई थी, जिसमें कुल 10 लोग शामिल थे—6 युवतियां और 4 युवक। इन चार युवकों में से दो युवक मुस्लिम समुदाय से बताए गए, जिनके नाम शान और वाकिफ हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पार्टी पूरी तरह निजी और शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी।
मुस्लिम युवकों की मौजूदगी पर भड़के कार्यकर्ता
इसी दौरान किसी माध्यम से बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं को सूचना मिली कि एक हिंदू युवती मुस्लिम युवकों के साथ कैफे में मौजूद है। आरोप है कि बिना किसी तथ्यात्मक पुष्टि के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब कथित तौर पर कार्यकर्ता कैफे के अंदर घुस गए और वहां मौजूद युवतियों व युवकों से अभद्रता और धमकी देने लगे। कैफे में अफरा-तफरी मच गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
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घटना की सूचना मिलते ही प्रेमनगर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने कैफे में मौजूद युवती, अन्य युवकों और कर्मचारियों को थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की। इस दौरान एक मुस्लिम युवक वाकिफ मौके से फरार हो गया, जबकि दूसरे युवक शान को पुलिस ने हिरासत में लिया। शुरुआत में पुलिस ने शांति भंग के आरोप में युवक शान, फरार वाकिफ और कैफे के एक स्टाफ सदस्य का चालान किया।
जांच में पलटा पूरा मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ प्रथम आशुतोष शिवम ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच के आदेश दिए। जांच में सामने आया कि—
- युवती बालिग है
- वह अपनी मर्जी से दोस्तों के साथ पार्टी में शामिल थी
- किसी भी तरह का दबाव, जबरदस्ती या धर्मांतरण का प्रमाण नहीं मिला
पुलिस ने युवती के परिजनों को भी थाने बुलाकर बयान दर्ज किए, जिन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी प्रकार की शिकायत या आशंका नहीं है।
बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज
जांच में यह स्पष्ट हो गया कि कैफे में हंगामा, नारेबाजी और भय का माहौल बनाने में बजरंग दल कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका थी। इसके बाद प्रेमनगर थाने में बजरंग दल के दो नेताओं समेत कुल 25 कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इन पर बलवा, मारपीट, अवैध प्रदर्शन, हंगामा और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
5 गिरफ्तार, एक नाबालिग
पुलिस ने नामजद आरोपियों में से प्रिंस, आकाश, आशीष, मिरदुन और दीपक को गिरफ्तार कर सोमवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया। एक आरोपी नाबालिग है, जिसके खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड में कार्रवाई की जा रही है। अन्य आरोपियों की पहचान के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो और मोबाइल रिकॉर्ड्स की जांच कर रही है।
पुलिस का सख्त संदेश
सीओ प्रथम आशुतोष शिवम ने साफ शब्दों में कहा— “कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं है। चाहे वह किसी भी संगठन से जुड़ा हो। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
समाज के लिए चेतावनी
यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि अफवाह, पहचान और भीड़ की मानसिकता किस तरह कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है। बिना जांच के लगाए गए आरोप न सिर्फ निर्दोषों की जिंदगी प्रभावित करते हैं, बल्कि समाज में अविश्वास और भय भी पैदा करते हैं।