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बरेली : UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा वर्ष 2026 में लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ देशभर में उठ रही आवाज़ों के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री खुलकर विरोध में सामने आए हैं। उन्होंने इन नियमों को शिक्षा की आत्मा और अकादमिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बताते हुए न सिर्फ विरोध दर्ज कराया, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया।

अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि UGC के नए नियम विश्वविद्यालयों में समानता के नाम पर निगरानी और भय की संस्कृति को जन्म दे रहे हैं। उनका आरोप है कि त्वरित कार्रवाई, अस्पष्ट परिभाषाएँ और अत्यधिक प्रशासनिक नियंत्रण से शिक्षक और छात्र दोनों असहज महसूस कर रहे हैं।


“यह विरोध शिक्षा को बचाने के लिए है”


अपने बयान में अग्निहोत्री ने कहा कि उनका विरोध किसी समुदाय या वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसे नियमों के खिलाफ है जो संवाद की जगह शिकायत को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा— “जब शिक्षा संस्थान सवाल पूछने से डरने लगें, तब चुप रहना अपराध बन जाता है।”


शिक्षा जगत में तेज़ हुई बहस


UGC नियमों के विरोध में पहले से ही छात्र संगठन, शिक्षक संघ और शिक्षाविद सवाल उठा रहे हैं। अग्निहोत्री का इस्तीफा इस आंदोलन को नई धार देता नजर आ रहा है। कई लोगों का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक पद पर रहते हुए असहमति दर्ज कराने का दुर्लभ उदाहरण है।


सरकारी प्रतिक्रिया


इस्तीफे के बाद राज्य सरकार की ओर से प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई है, वहीं UGC नियमों को लेकर बहस और तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला अब केवल एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उच्च शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय विमर्श का रूप ले चुका है।


आगे क्या?

  • क्या UGC नियमों में संशोधन होगा?
  • क्या सरकार विरोध कर रहे शिक्षाविदों और अधिकारियों से संवाद करेगी?
  • क्या यह आंदोलन देशव्यापी रूप लेगा?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तय करेंगे कि यह विरोध सिर्फ एक घटना था या शिक्षा नीति में बदलाव की शुरुआत।

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