उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन की सख्ती एक बार फिर देखने को मिली है। भोजीपुरा थाना क्षेत्र के घनघोरा पिपरिया गांव में ग्राम समाज की जमीन पर बनी एक मस्जिद को कोर्ट के आदेश के बाद बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक निगरानी में की गई इस कार्रवाई ने इलाके में हलचल मचा दी, हालांकि प्रशासन ने पूरे ऑपरेशन को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा किया।
बरेली। उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत बरेली जिला प्रशासन ने शनिवार को एक बड़ा कदम उठाया। भोजीपुरा थाना क्षेत्र के घनघोरा पिपरिया गांव, जो भोजीपुरा टोल प्लाजा के पास स्थित है, वहां ग्राम समाज की जमीन पर बनी एक मस्जिद को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। यह कार्रवाई न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद की गई। प्रशासन ने इस ध्वस्तीकरण अभियान को लेकर पहले से पूरी तैयारी कर रखी थी। मौके पर दो बुलडोजर, भारी पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और राजस्व विभाग की टीम मौजूद रही। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
किस मस्जिद पर हुई कार्रवाई?
जानकारी के अनुसार, यह मस्जिद आला हजरत के नाम से बनाई गई थी। प्रशासन का कहना है कि यह मस्जिद ग्राम समाज की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित की गई थी। मस्जिद करीब 300 वर्गगज क्षेत्रफल में बनी हुई थी। इस निर्माण को लेकर पिछले कई वर्षों से विवाद चल रहा था, जो आखिरकार न्यायालय तक पहुंचा। अदालत से किसी प्रकार की राहत न मिलने के बाद प्रशासन ने इसे अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।
2008 से चल रही थी कानूनी लड़ाई
एसडीएम सदर प्रमोद कुमार ने बताया कि जिस भूमि पर मस्जिद बनी थी, वह राजस्व रिकॉर्ड में ‘बंजर भूमि’ (श्रेणी-5) और सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है। यह जमीन गाटा संख्या 1474 में आती है। उन्होंने बताया कि इस मामले में साल 2008 से कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। पहले तहसीलदार न्यायालय ने बेदखली के आदेश जारी किए थे। इसके बाद पक्षकारों ने सिविल कोर्ट में भी याचिका दाखिल की, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
जुर्माना भी किया गया था जमा
प्रशासन के अनुसार, बेदखली की प्रक्रिया के तहत नियमानुसार जुर्माने का प्रावधान भी था, जिसे संबंधित पक्षकारों द्वारा पहले ही जमा कर दिया गया था। हालांकि सिविल कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकी हुई थी। अब जब अदालत से अंतिम आदेश आ गया, तो जिला प्रशासन ने बिना देरी किए कार्रवाई को अंजाम दिया।
भारी सुरक्षा व्यवस्था, नहीं होने दिया कोई बवाल
कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो, इसके लिए भोजीपुरा थाना पुलिस, पीएसी और अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई थी। पूरे इलाके में ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए निगरानी रखी गई। ध्वस्तीकरण की सूचना मिलते ही भीम आर्मी से जुड़े कुछ कार्यकर्ता गांव की ओर बढ़ने लगे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें मौके पर ही समझा-बुझाकर रोक दिया। अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश पर की जा रही है और इसमें किसी भी तरह के राजनीतिक या संगठनात्मक हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
एसडीएम प्रमोद कुमार ने कहा, “यह कार्रवाई किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है। यह पूरी तरह से न्यायालय के आदेश और कानून के दायरे में की गई है। अवैध निर्माण चाहे किसी का भी हो, उसे हटाया जाएगा।” प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ग्राम समाज या सरकारी जमीन पर किसी भी तरह के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इलाके में तनाव लेकिन स्थिति नियंत्रण में
ध्वस्तीकरण के दौरान इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति जरूर बनी, लेकिन प्रशासन की सतर्कता के चलते हालात पूरी तरह नियंत्रण में रहे। किसी भी प्रकार की झड़प या हिंसा की सूचना नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला लंबे समय से विवाद का कारण बना हुआ था और अब अदालत के फैसले के बाद कार्रवाई होना तय था।
यूपी में लगातार जारी है बुलडोजर एक्शन
उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई लगातार जारी है। इससे पहले भी कई जिलों में ग्राम समाज, वन भूमि और सरकारी जमीन पर बने अवैध ढांचों को हटाया जा चुका है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान कानून व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। बरेली के घनघोरा पिपरिया गांव में हुई यह कार्रवाई एक बार फिर यह संदेश देती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। अदालत के आदेश के बाद की गई यह ध्वस्तीकरण कार्रवाई प्रशासन की सख्ती और न्यायिक प्रक्रिया की अंतिमता को दर्शाती है। आने वाले समय में भी ऐसे मामलों में प्रशासन की सख्त नीति जारी रहने की संभावना है।