उत्तर प्रदेश की अयोध्या जिला जेल से सुरक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां हत्या और बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में बंद दो कैदी फिल्मी अंदाज में जेल से फरार हो गए। विशेष सुरक्षा कक्ष में रखे गए इन कैदियों की फरारी ने जेल प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजी जेल ने तुरंत एक्शन लेते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित जिला जेल से सामने आई यह घटना न केवल जेल प्रशासन बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र के लिए बड़ा सवाल बन गई है। हाई सिक्योरिटी मानी जाने वाली जेल से दो कैदियों का इस तरह फरार हो जाना सिस्टम की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।
रात के अंधेरे में रची गई फरार होने की साजिश
जानकारी के मुताबिक, दोनों कैदी रात के समय जिला जेल के विशेष सुरक्षा कक्ष नंबर-4 में बंद थे। सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद कैदियों ने बेहद शातिर तरीके से फरारी की योजना बनाई। जांच में सामने आया है कि कैदियों ने सुरक्षा कक्ष के रोशनदान के नीचे से दो से तीन ईंटें निकाल दीं, जिससे दीवार में सुराख बन गया। इसके बाद उन्होंने तन्हाई बैरक को तोड़ा और जेल की बाउंड्री वॉल कूदकर फरार हो गए। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान जेल में तैनात किसी भी सुरक्षाकर्मी को भनक तक नहीं लगी।
सुबह की काउंटिंग में खुला राज
कैदियों की फरारी का खुलासा सुबह करीब 7:30 बजे हुआ, जब रोजाना की तरह बंदियों की गिनती की जा रही थी। जब दोनों कैदी अपनी-अपनी जगह पर नहीं मिले, तो जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। तत्काल उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई और जेल परिसर में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया, लेकिन तब तक कैदी जेल की दीवारों से काफी दूर निकल चुके थे।
कौन हैं फरार कैदी?
फरार कैदियों की पहचान इस प्रकार की गई है— शेर अली, निवासी सुल्तानपुर — हत्या के मामले में निरुद्ध
गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरि, निवासी अमेठी — बलात्कार के मामले में जेल में बंद
दोनों ही आरोपी गंभीर आपराधिक मामलों में बंद थे, ऐसे में इनका फरार होना आम जनता की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
डीजी जेल ने माना सुरक्षा में बड़ी चूक
इस पूरे मामले पर डीजी जेल पीसी मीणा ने साफ कहा कि यह जेल सुरक्षा में गंभीर चूक है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। डीजी जेल के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई करते हुए—
- वरिष्ठ जेल अधीक्षक उदय प्रताप मिश्रा
- जिला जेलर के. यादव
- डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी
- एक हेड जेल वार्डन
- तीन जेल वार्डन
को निलंबित कर दिया गया है।
DIG जेल अयोध्या रेंज का बयान
इस मामले में DIG जेल अयोध्या रेंज शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने जानकारी देते हुए बताया कि— “प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि दोनों बंदी विशेष सुरक्षा कक्ष में रखे गए थे। उसी कक्ष के रोशनदान के नीचे से ईंट निकालकर वे बाहर निकले। इस पूरे घटनाक्रम में ड्यूटी पर तैनात सिपाही और चेकिंग स्टाफ की लापरवाही सामने आई है।” DIG ने यह भी कहा कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
फरार कैदियों की तलाश में जुटी पुलिस
कैदियों की फरारी के बाद अयोध्या सहित आसपास के जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस और जेल प्रशासन की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं। संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और सीमावर्ती जिलों में भी नाकाबंदी की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों कैदियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और फरारी में किसी बाहरी मदद की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जेल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर तब, जब गंभीर अपराधों में बंद कैदी विशेष सुरक्षा कक्ष से ही फरार हो जाएं। सवाल यह भी उठ रहा है कि—
- क्या रात में पर्याप्त गश्त हो रही थी?
- क्या सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे?
- ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने समय पर जांच क्यों नहीं की?
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहला मौका नहीं है जब यूपी की जेलों से कैदियों के फरार होने की खबर सामने आई हो। इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों से जेल लापरवाही के मामले उजागर हो चुके हैं। हालांकि हर बार जांच और निलंबन के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल पूरे मामले की विभागीय और पुलिस जांच जारी है। फरार कैदियों की गिरफ्तारी प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। साथ ही जेल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अब देखने वाली बात यह होगी कि फरार कैदी कब तक कानून के शिकंजे में आते हैं और क्या इस बार लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त और स्थायी कार्रवाई होती है या नहीं।