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उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब बांदा से दिल्ली जा रही एक यात्री बस अचानक चलते-चलते भीषण आग की चपेट में आ गई। कुछ ही मिनटों में बस ‘आग का गोला’ बन गई और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। हालात इतने भयावह थे कि कई यात्रियों को खिड़की और दरवाजों से कूदकर जान बचानी पड़ी। राहत की बात ये रही कि समय रहते सभी यात्री बस से बाहर निकल आए और इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।

यमुना एक्सप्रेस-वे पर अचानक मची चीख-पुकार, बस बनी ‘आग का गोला’

मथुरा से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने कुछ देर के लिए पूरे यमुना एक्सप्रेस-वे को दहला दिया। गुरुवार को जब एक यात्री बस तेज रफ्तार में अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी, तभी अचानक उसमें आग लग गई। देखते ही देखते बस में धुआं भर गया और आग की लपटें भड़क उठीं। कुछ सेकेंड पहले तक जहां लोग आराम से बैठे थे, अगले ही पल वहां जान बचाने की जंग शुरू हो गई। बस में बैठे यात्रियों को जब खतरे का अहसास हुआ, तो उन्होंने बस के दरवाजों के साथ-साथ खिड़कियों से भी कूदकर अपनी जान बचाई। चारों तरफ अफरा-तफरी, चीखें और दहशत का माहौल बन गया।

माइलस्टोन 110 पर हादसा, राया थाना क्षेत्र में हुआ घटनाक्रम

यह घटना मथुरा के राया थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस-वे पर माइलस्टोन 110 के पास हुई। बताया जा रहा है कि बस में आग लगते ही कुछ यात्री घबरा गए और मौके पर ही भागने लगे। कुछ लोग बस के अंदर सामान छोड़कर बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस कुछ ही मिनटों में धू-धूकर जलने लगी। आग इतनी भयानक थी कि दूर से देखने पर बस पूरी तरह से आग का गोला नजर आ रही थी।

बांदा से दिल्ली जा रही थी बस, 40 से 50 यात्री थे सवार

जानकारी के मुताबिक बस संख्या UP-90AT8837 बांदा से दिल्ली की ओर जा रही थी। इस बस में करीब 40 से 50 यात्री सवार थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन अचानक बस में तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट की आशंका के बीच आग लग गई। यात्रियों को पहले धुएं की गंध महसूस हुई और फिर देखते ही देखते लपटें उठने लगीं। कई यात्री इतने डर गए कि उन्होंने बस का दरवाजा खुलने का इंतजार नहीं किया और खिड़की से छलांग लगा दी।

कुछ ही मिनटों में जल उठी बस, यात्रियों ने खिड़की-दरवाजों से कूदकर बचाई जान

आग के फैलने की रफ्तार इतनी तेज थी कि यात्रियों के पास सोचने तक का वक्त नहीं बचा। कई लोग चीखते हुए बाहर निकलने लगे। कुछ यात्रियों ने बच्चों और महिलाओं को पहले बाहर निकाला। अचानक आग की चमक और धुएं के कारण पूरे एक्सप्रेस-वे पर दहशत फैल गई। यात्रियों का कहना है कि अगर कुछ मिनट भी देर हो जाती, तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।
राहत की बात ये रही कि सभी लोग समय रहते बस से उतर गए और किसी की जान नहीं गई।

फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा, आग पर पाया गया काबू

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने तेजी से मोर्चा संभालते हुए आग बुझाने का काम शुरू किया। बताया गया कि आग को काबू में करने में कुछ समय लगा, क्योंकि बस के अंदर आग पूरी तरह फैल चुकी थी। आग बुझने के बाद बस लगभग पूरी तरह जल चुकी थी। इसके बाद पुलिस ने बस को रोड से हटवाकर यातायात व्यवस्था को सामान्य कराया।

शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच शुरू

प्रारंभिक तौर पर आग लगने का कारण तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक बस के फिटनेस और कागजात पूरे बताए गए हैं, लेकिन फिर भी आग लगने के पीछे की वास्तविक वजह की जांच की जा रही है।
कई बार पुराने वायरिंग सिस्टम, ओवरहीटिंग या उपकरणों की खराबी के कारण चलती गाड़ियों में अचानक आग लग जाती है।
फिलहाल जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि आग बस के किस हिस्से से शुरू हुई थी और क्या इसमें किसी तरह की लापरवाही शामिल थी।

बस में कौन-कौन था सवार? सामने आए यात्रियों के नाम

बताया जा रहा है कि इस बस में इजाज, अतुल, श्याम सिंह, सोनू, सरोज, उमा, अजय सोनी, शिवानी, आरती और दयाराम समेत कई यात्री मौजूद थे। सभी यात्रियों ने समय रहते बस से उतरकर अपनी जान बचा ली। कई यात्री सदमे में दिखे और कुछ लोगों की हालत रोने जैसी हो गई। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार इतना भयावह मंजर देखा।

यात्री बोले- “सबकुछ कुछ सेकेंड में बदल गया… हम बस जान बचाकर भागे”

घटना के बाद यात्रियों की जुबानी कई डरावनी बातें सामने आईं। एक यात्री ने कहा, “पहले हल्का धुआं दिखा… फिर अचानक आग की लपटें बढ़ने लगीं। हमें लगा बस अभी ब्लास्ट हो जाएगी, इसलिए हम कूदकर भागे।” वहीं दूसरे यात्री ने कहा,
“सामान छोड़ दिया, बस जान बचाना जरूरी था।” इन बातों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात कितने भयावह थे।

पहले भी यूपी में हो चुका है ऐसा हादसा, कानपुर बस आग की घटना याद दिलाई

यह घटना यूपी के उस पुराने मामले की भी याद दिलाती है, जब पिछले साल नवंबर में कानपुर में दिल्ली-वाराणसी स्लीपर बस में आग लग गई थी। उस वक्त भी यात्रियों को खिड़की-दरवाजों से कूदकर अपनी जान बचानी पड़ी थी। उस बस में आग सबसे पहले छत पर रखे सामान में लगी थी, जिससे यात्रियों को कुछ समय मिला और कई लोग बच पाए थे। कुछ यात्री ऊपरी बर्थ में फंस गए थे, जिन्हें बाद में पुलिसकर्मियों ने बाहर निकाला था।

सवाल बड़ा: बसों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत?

मथुरा बस आग की घटना ने फिर एक बार परिवहन सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

  • क्या बसों की तकनीकी जांच समय से हो रही है?
  • क्या वायरिंग और इंजन सिस्टम की नियमित जांच होती है?
  • क्या यात्रियों की सुरक्षा के लिए फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद होते हैं?

इन सवालों के जवाब जरूरी हैं, क्योंकि एक छोटी सी तकनीकी खामी भी कभी-कभी कई जिंदगियों को खतरे में डाल देती है।

गनीमत रही… बड़ा हादसा टला, लेकिन डर बना रहेगा

इस घटना में सबसे राहत वाली बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन

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