उत्तर प्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई ने संतकबीर नगर और आजमगढ़ में सनसनी फैला दी है। मौलाना शमशुल हुदा खान के ठिकानों पर हुई छापेमारी में करोड़ों रुपये की 17 संपत्तियों के दस्तावेज बरामद होने का दावा किया गया है। विदेशी नागरिकता, सरकारी वेतन और संदिग्ध बैंक लेनदेन को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है।
उत्तर प्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने बुधवार, 11 फरवरी को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए संतकबीर नगर और आजमगढ़ जिलों में मौलाना शमशुल हुदा खान के चार ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई पीएमएलए (Prevention of Money Laundering Act) के तहत की गई। लखनऊ से पहुंची विशेष टीम ने खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र और आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित आवासों सहित अन्य परिसरों में घंटों सर्च ऑपरेशन चलाया। इस छापेमारी के दौरान ED को 17 अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इन संपत्तियों का घोषित मूल्य लगभग 3 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, लेकिन जांच एजेंसी का अनुमान है कि इनकी वास्तविक बाजार कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा 33 करोड़ रुपये तक बताया गया है। यही नहीं, करीब 5 करोड़ रुपये की नकद जमा भी संदिग्ध पाई गई है, जिसकी जांच की जा रही है।
विदेशी नागरिकता और सरकारी लाभ का मामला
जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। ED के मुताबिक, मौलाना शमशुल हुदा खान ने वर्ष 2013 में यूनाइटेड किंगडम (UK) की नागरिकता प्राप्त कर ली थी। इसके बावजूद उन्होंने 2017 तक आजमगढ़ स्थित मदरसा अशरफिया में सरकारी वेतन लिया और वर्ष 2023 तक पेंशन भी प्राप्त की। एजेंसी को संदेह है कि विदेशी नागरिकता छिपाकर सरकारी लाभ उठाया गया। अगर यह आरोप साबित होते हैं तो यह न सिर्फ वित्तीय अनियमितता बल्कि गंभीर कानूनी उल्लंघन का मामला बन सकता है।
बैंक खातों में 5.5 करोड़ से अधिक की संदिग्ध एंट्री
ED ने मौलाना, उनकी पत्नी, बेटे, बहू और ‘रजा फाउंडेशन’ नामक एक एनजीओ से जुड़े चार बैंक खातों की जांच की। इन खातों में वर्ष 2007 से 2025 के बीच 5.5 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध एंट्री पाई गई है। ये खाते सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा, HDFC बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में संचालित बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी अब इन लेनदेन के स्रोत और उपयोग की बारीकी से पड़ताल कर रही है। सूत्रों के अनुसार, कुछ रकम विदेशी स्रोतों से भी आई हो सकती है, जिसकी पुष्टि के लिए वित्तीय ट्रेल खंगाली जा रही है।
ATS और पुलिस की FIR के आधार पर केस
प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश एटीएस और पुलिस द्वारा दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर की है। इन एफआईआर में विदेशी नागरिकता छिपाने, सरकारी धन के दुरुपयोग और संदिग्ध विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप शामिल हैं। ED ने इन आरोपों के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। एजेंसी यह भी देख रही है कि कहीं एनजीओ के माध्यम से विदेशी फंडिंग का गलत इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
NGO की भूमिका पर भी सवाल
‘रजा फाउंडेशन’ नामक एनजीओ की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि इस संस्था के जरिए संदिग्ध लेनदेन किए गए। ED यह जांच कर रही है कि क्या एनजीओ को मिले फंड का उपयोग वैध गतिविधियों में हुआ या फिर निजी संपत्ति बनाने में। अगर जांच में अनियमितता साबित होती है, तो एनजीओ के पंजीकरण और फंडिंग पर भी कार्रवाई हो सकती है।
इलाके में हड़कंप, राजनीतिक हलचल तेज
ED की इस कार्रवाई से संतकबीर नगर और आजमगढ़ में हड़कंप मच गया है। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम बता रहा है, वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक दृष्टि से भी देख रहे हैं। हालांकि, ED ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई पूरी तरह दस्तावेजी साक्ष्यों और दर्ज मामलों के आधार पर की गई है।
आगे क्या?
जांच एजेंसी अब बरामद दस्तावेजों, बैंक ट्रांजैक्शन और संपत्तियों के वास्तविक मूल्यांकन की प्रक्रिया में जुटी है। विदेशी निवेश और फंडिंग की भी गहन जांच की जा रही है। यदि मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी लाभ के दुरुपयोग के आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई संभव है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं। ED की टीम दस्तावेजों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की तैयारी में है। मौलाना शमशुल हुदा खान पर ED की यह कार्रवाई कई गंभीर सवाल खड़े करती है — क्या विदेशी नागरिकता छिपाकर सरकारी वेतन और पेंशन ली गई? क्या एनजीओ के माध्यम से संदिग्ध फंडिंग का इस्तेमाल निजी संपत्तियां बनाने में हुआ? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल, ED की इस कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र में हलचल जरूर पैदा कर दी है।