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उत्तर प्रदेश सरकार के 2026-27 के रिकॉर्ड 9.12 लाख करोड़ रुपये के बजट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी गई है। मेरठ, मुरादाबाद, मथुरा-वृंदावन और बरेली के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, डेयरी और महिला सुरक्षा से जुड़ी बड़ी घोषणाएं कर सरकार ने विकास की नई रूपरेखा पेश की है। गन्ना किसानों से लेकर छात्राओं और कामकाजी महिलाओं तक—हर वर्ग को साधने की कोशिश इस बजट में साफ झलकती है।

UP Budget 2026: वेस्ट यूपी को विकास का ‘स्पेशल पैकेज’

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 9.12 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया। बजट भाषण के दौरान यह स्पष्ट दिखाई दिया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शीर्ष पर है। गन्ना किसानों का कई बार उल्लेख, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, खेल और शिक्षा क्षेत्र में बड़े संस्थानों की स्थापना, महिला सशक्तिकरण योजनाएं—इन सभी बिंदुओं ने साफ संकेत दिया कि वेस्ट यूपी को विकास का नया चेहरा बनाने की रणनीति तैयार हो चुकी है।

मथुरा-वृंदावन: धार्मिक पर्यटन को 700 करोड़ की ताकत

बजट में मथुरा-वृंदावन, मेरठ और कानपुर विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मथुरा-वृंदावन में सड़क चौड़ीकरण, सीवर व्यवस्था, घाटों का सौंदर्यीकरण, पार्किंग और यातायात प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे धार्मिक पर्यटन में इजाफा होने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य है कि इन शहरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक हब के रूप में स्थापित किया जाए।

मुरादाबाद: गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी को नई पहचान

मुरादाबाद में गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। वर्तमान में यह विश्वविद्यालय अस्थायी भवन से संचालित हो रहा है। भूमि चयन और निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। नई बजटीय राशि मिलने से निर्माण गति पकड़ने की उम्मीद है। शासन ने जुलाई 2026 तक कैंपस निर्माण पूरा करने की समयसीमा तय की है। यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने की मजबूरी कम कर सकती है।

मेरठ: मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी

मेरठ के सलावा में लगभग 100 एकड़ भूमि पर बन रही मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी को भी बजट में प्रमुखता से शामिल किया गया। इसका अनुमानित बजट 700 करोड़ रुपये है। सीएम द्वारा अप्रैल से प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। यह विश्वविद्यालय न केवल खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण देगा, बल्कि स्पोर्ट्स साइंस, फिजियोथेरेपी और खेल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा।

बरेली: डेयरी से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक

बरेली के लिए बजट में बहुआयामी घोषणाएं की गई हैं।

मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी

महिला सामर्थ्य योजना के अंतर्गत बरेली में मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी गठित की गई है। इससे स्थानीय पशुपालकों को बेहतर दाम और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिलेगा। डेयरी सेक्टर में मूल्य संवर्धन और बाजार विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर

जिला अस्पताल में इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की घोषणा से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद है। सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मामलों में त्वरित उपचार संभव होगा।

छात्राओं के लिए हॉस्टल

बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए छात्रावासों का निर्माण प्रस्तावित है। इससे दूरदराज क्षेत्रों की छात्राओं को उच्च शिक्षा के अवसर मिलेंगे।

दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर

बरेली को दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से जोड़ने का फायदा मिलने की संभावना जताई गई है। इससे औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

महिला सुरक्षा

वर्किंग वूमेन हॉस्टल निर्माण और सेफ सिटी परियोजना के तहत सीसीटीवी नेटवर्क विस्तार से शहरी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का दावा किया गया है। एंटी रोमियो स्क्वाड की सक्रियता भी बढ़ाई जाएगी।

गन्ना किसानों पर खास जोर

पश्चिमी यूपी गन्ना उत्पादन का बड़ा केंद्र है। बजट में गन्ना किसानों का विशेष उल्लेख किया गया। भुगतान प्रक्रिया में तेजी, मिलों के आधुनिकीकरण और किसान कल्याण योजनाओं को गति देने का संकेत दिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय बढ़ेगी।

आर्थिक और राजनीतिक संदेश

विश्लेषकों के अनुसार, वेस्ट यूपी में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और शिक्षा संस्थानों को प्राथमिकता देकर सरकार आर्थिक विकास और राजनीतिक संतुलन—दोनों साधने की कोशिश कर रही है। धार्मिक शहरों का विकास, खेल विश्वविद्यालय, डेयरी और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे शहरी और ग्रामीण दोनों मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं।

जमीन पर कितना उतरेगा बजट?

घोषणाएं भले बड़ी हों, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन है। समयसीमा में निर्माण, पारदर्शिता और स्थानीय स्तर पर लाभ पहुंचना—ये सभी पहलू महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि योजनाएं तय समय में पूरी होती हैं, तो वेस्ट यूपी को शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और औद्योगिक विकास में नई पहचान मिल सकती है।

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