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बरेली। उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। मुरादाबाद जिले में 5 दिसंबर को आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों की सूची में 37 अपात्र जोड़े पाए गए हैं। इस कार्यक्रम में कुल 1,600 जोड़ों का विवाह कराया गया था। मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

यह मामला भाजपा के कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह की शिकायत के बाद उजागर हुआ। विधायक ने आरोप लगाया कि योजना के तहत लाभार्थियों के सत्यापन में भारी भ्रष्टाचार किया गया और शादी के बाद मिलने वाली घरेलू सामग्री के वितरण में भी अनियमितताएं बरती गईं। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सामाजिक कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सभी 1,600 जोड़ों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए।

जिला स्तर पर गठित हुई जांच समिति

मुरादाबाद के जिलाधिकारी अनुज कुमार सिंह ने बताया कि सामूहिक विवाह से जुड़े दस्तावेजों की जांच के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया था। समिति ने रिकॉर्ड और मौके पर जाकर जांच की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिलाधिकारी ने बताया कि जांच में पाया गया कि 37 जोड़े पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें से 34 मामले मुंडापांडेय ब्लॉक से संबंधित हैं, जबकि शेष मामले शहर क्षेत्र और अन्य ब्लॉकों से जुड़े हुए हैं।

पात्र लाभार्थियों को नहीं मिले उपहार किट

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई ऐसे जोड़े, जो पूरी तरह से पात्र थे, उन्हें योजना के तहत मिलने वाली अनिवार्य उपहार किट नहीं दी गई। इसमें घरेलू उपयोग की आवश्यक सामग्री शामिल होती है, जो नवविवाहित दंपतियों को दी जाती है। जिलाधिकारी अनुज कुमार सिंह ने बताया कि जिन लाभार्थियों को अब तक उपहार सामग्री नहीं मिली थी, उन्हें अब वितरण कराया जा रहा है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों के सत्यापन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

भ्रष्टाचार के आरोपों से मचा हड़कंप

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। ऐसे में इस योजना में अपात्रों को लाभ दिए जाने और पात्रों को वंचित रखने के आरोपों से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। फिलहाल जिला प्रशासन पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अपात्र जोड़ों को योजना का लाभ कैसे मिला और इसमें किन अधिकारियों की भूमिका रही।

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