बरेली में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल एक बार फिर खुल गई है। जिला अस्पताल और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय उस वक्त हंगामे का केंद्र बन गया, जब गलत इलाज के शिकार युवक को उसके परिजन ऑटो में लिटाकर CMO दफ्तर पहुंच गए। परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम क्लीनिक चला रहे हैं और शिकायतों के बावजूद न तो मुकदमा दर्ज किया जा रहा है और न ही सख्त कार्रवाई हो रही है। यह मामला न केवल एक मरीज की जिंदगी से जुड़ा है, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जिला अस्पताल में हंगामा, सिस्टम पर उठे सवाल
बरेली जिले में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। बुधवार को जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक गंभीर रूप से बीमार युवक को उसके परिजन ऑटो में लिटाकर कार्यालय परिसर में ले आए। युवक लगातार उल्टियां कर रहा था और उसकी हालत बेहद नाज़ुक बताई जा रही थी। परिजनों का आरोप है कि झोलाछाप डॉक्टर के गलत ऑपरेशन ने युवक की जान को खतरे में डाल दिया, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
ऑटो में तड़पता रहा मरीज, परिजन लगाते रहे गुहार
बारादरी थाना क्षेत्र के डोहरा गौटिया निवासी शिशुपाल अपने बेटे अजय को लेकर CMO कार्यालय पहुंचे। अजय ऑटो में लेटा हुआ था और दर्द से कराह रहा था। परिजनों के अनुसार, युवक की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। वह न तो ठीक से चल पा रहा है और न ही सामान्य गतिविधियां कर पा रहा है। परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला।
पेट दर्द के इलाज में कर दिया ऑपरेशन!
पीड़ित पिता शिशुपाल ने बताया कि करीब एक महीने पहले उनके बेटे अजय को पेट दर्द की शिकायत हुई थी। जांच रिपोर्ट लेकर वह पीलीभीत बाईपास स्थित प्रथ्वी फार्मा क्लीनिक पहुंचे। वहां जयवीर नामक व्यक्ति ने खुद को डॉक्टर बताते हुए इलाज शुरू किया। आरोप है कि जयवीर ने पेशाब की जगह में पानी भरने की बात कहकर अजय का ऑपरेशन कर दिया।
परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद 25 दिनों तक युवक को क्लीनिक बुलाया गया। कई बार टांके लगाए गए, पट्टियां बदली गईं, लेकिन हालत में सुधार होने के बजाय लगातार रक्तस्राव होता रहा। जब अजय की तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी, तब परिवार को एहसास हुआ कि उनके साथ गंभीर लापरवाही हुई है।
हालत बिगड़ने पर खुली पोल
परिजनों के अनुसार, गलत ऑपरेशन के कारण अजय की हालत इस कदर खराब हो गई कि वह उठने-बैठने में भी असमर्थ हो गया। लगातार उल्टियां और कमजोरी ने परिवार की चिंता बढ़ा दी। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की। जांच के बाद नोडल अधिकारी ने क्लीनिक को सील तो करवा दिया, लेकिन यहीं पर कार्रवाई ठहर गई।
क्लीनिक सील, मगर आरोपी पर मेहरबानी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब क्लीनिक अवैध था और आरोपी झोलाछाप पाया गया, तो उसके खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई? परिजनों का आरोप है कि नोडल अधिकारी और CMO की मिलीभगत से आरोपी को बचाया जा रहा है। न तो थाने को कोई रिपोर्ट भेजी गई और न ही कानूनी कार्रवाई की गई।
बुधवार को चर्चा यह भी रही कि आरोपी जयवीर खुद नोडल अधिकारी से मिलने CMO कार्यालय पहुंचा था। इसने परिजनों के गुस्से को और भड़का दिया। उनका कहना है कि जब पीड़ित परिवार दर-दर भटक रहा है, तब आरोपी बेखौफ अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।
आरोपी ने आरोपों से किया इनकार
वहीं आरोपी जयवीर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उसका कहना है कि उसने कोई ऑपरेशन नहीं किया और उस पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। वह लिखित बयान देने के लिए कार्यालय आया था। हालांकि परिजनों का कहना है कि अगर उसने कुछ गलत नहीं किया, तो क्लीनिक सील क्यों किया गया?
धरने की चेतावनी, पुलिस ने संभाला मोर्चा
कार्रवाई न होने से नाराज परिजनों ने CMO कार्यालय में धरना देने की चेतावनी दी। हालात बिगड़ते देख कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
CMO और नोडल अधिकारी रहे खामोश
इस पूरे मामले में जब CMO विश्राम सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन नहीं उठा। वहीं नोडल अधिकारी अमित ने भी कोई स्पष्ट जानकारी देने से बचते नजर आए। अधिकारियों की चुप्पी ने स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
क्या बरेली में झोलाछाप डॉक्टरों को प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है?
क्लीनिक सील होने के बावजूद आरोपी पर एफआईआर क्यों नहीं?
एक मरीज की जान से खिलवाड़ करने वालों पर कब होगी सख्त कार्रवाई?
यह मामला सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर खामी को उजागर करता है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे झोलाछाप और कितनी जिंदगियों से खिलवाड़ करते रहेंगे?