संभल हिंसा केस में बड़ा प्रशासनिक कदम
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हुई हिंसा के मामले में प्रशासन ने अब निर्णायक रुख अपना लिया है। हिंसा के कथित मास्टरमाइंड शारिक साठा के खिलाफ आज बड़ा एक्शन होने जा रहा है। अदालत के आदेश पर संभल के दीपा सराय इलाके में स्थित शारिक साठा के मकान को कुर्क किया जाएगा। कोर्ट द्वारा संपत्ति कुर्की का स्थाई वारंट जारी किए जाने के बाद प्रशासन और पुलिस की टीमें पूरी तैयारी के साथ मौके पर तैनात की गई हैं। यह कार्रवाई सिर्फ एक मकान की कुर्की नहीं, बल्कि उस अपराध नेटवर्क के खिलाफ एक कड़ा संदेश मानी जा रही है, जिस पर संभल की कानून व्यवस्था को हिला देने का आरोप है।
कौन है शारिक साठा?
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शारिक साठा एक कुख्यात अपराधी है, जिसके खिलाफ विभिन्न थाना क्षेत्रों में कुल 69 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या, आर्म्स एक्ट, अवैध हथियारों की तस्करी और हिंसा भड़काने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि वह पिछले कई वर्षों से संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़ा हुआ है और फिलहाल विदेश, खासतौर पर दुबई से अपने नेटवर्क को संचालित कर रहा है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच के अधीन हैं और कानून के अनुसार अंतिम फैसला अदालत द्वारा ही किया जाएगा।
संभल हिंसा: जब शहर थर्रा उठा
24 नवंबर 2024 को संभल में उस समय हालात बेकाबू हो गए, जब स्थानीय अदालत के आदेश पर शाही जामा मस्जिद के आसपास सर्वे किया जा रहा था। इस दौरान अचानक हालात बिगड़ गए और प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच टकराव शुरू हो गया। देखते ही देखते पत्थरबाजी, आगजनी और गोलीबारी जैसी घटनाएं सामने आईं। कई लोग घायल हुए और कुछ की जान भी चली गई। पूरे इलाके में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। पुलिस और प्रशासन को भारी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाना पड़ा।
जांच में सामने आई कथित साजिश
हिंसा के बाद गठित एसआईटी और पुलिस जांच में यह दावा किया गया कि यह हिंसा अचानक नहीं भड़की, बल्कि इसके पीछे एक संगठित साजिश थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस साजिश में शारिक साठा की भूमिका मुख्य रूप से सामने आई। पुलिस का कहना है कि उसने अपने स्थानीय सहयोगियों के जरिए भीड़ को उकसाने, हथियारों की आपूर्ति कराने और हिंसा को दिशा देने का काम किया। हालांकि शारिक खुद मौके पर मौजूद नहीं था, लेकिन पुलिस का दावा है कि वह दूर बैठकर पूरे घटनाक्रम को नियंत्रित कर रहा था।
विदेश से नेटवर्क संचालन का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि शारिक साठा लंबे समय से दुबई में रहकर अपने आपराधिक नेटवर्क को संचालित कर रहा है। पुलिस के अनुसार, वह वहीं से अपने गैंग को निर्देश देता था और भारत में फैले अपने संपर्कों के जरिए गतिविधियां संचालित करता था। इसी आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया, उसे प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित किया गया और अब इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
आज होगी संपत्ति कुर्की
अदालत ने शारिक साठा के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उसके घर की कुर्की का स्थाई वारंट जारी किया है। इसके तहत आज दीपा सराय स्थित उसके मकान को आधिकारिक रूप से कुर्क किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई कानून के दायरे में और पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। साथ ही पुलिस उसके और उसके गिरोह से जुड़ी अन्य संपत्तियों की भी जांच कर रही है, जिन्हें भविष्य में जब्त किया जा सकता है।
कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन का संदेश
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक आरोपी के खिलाफ नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के खिलाफ चेतावनी है जो कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करते हैं। संभल हिंसा ने पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे और अब प्रशासन यह दिखाना चाहता है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
जनता की नजरें और भावनाएं
संभल के स्थानीय लोगों के लिए यह मामला सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि न्याय की उम्मीद से जुड़ा हुआ है। जिन परिवारों ने हिंसा में अपने प्रियजनों को खोया, वे अब चाहते हैं कि इस मामले में निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई हो। कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक मास्टरमाइंड और उसके नेटवर्क पर पूरी तरह कार्रवाई नहीं होगी, तब तक लोगों का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो पाएगा।
कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्षता
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति कुर्की जैसी कार्रवाई तब की जाती है जब आरोपी लगातार फरार हो और जांच में सहयोग न करे। यह एक वैधानिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि आरोपी को कानून के तहत अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार मिले। शारिक साठा के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों का अंतिम फैसला अदालत के निर्णय पर ही निर्भर करेगा।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
- क्या शारिक साठा को विदेश से भारत लाया जा सकेगा?
- क्या इंटरपोल की मदद से गिरफ्तारी संभव होगी?
- क्या संभल हिंसा के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो पाएगा?
- इन सवालों के जवाब आने वाले समय में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर निर्भर करेंगे।