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संभल हिंसा केस के बाद न्यायपालिका में भूचाल

उत्तर प्रदेश के संभल जिले से जुड़े हिंसा मामले ने अब केवल पुलिस प्रशासन ही नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को भी केंद्र में ला दिया है। एएसपी अनुज चौधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने वाले संभल के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया है। उन्हें सीजेएम पद से हटाकर सुल्तानपुर में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) बनाया गया है, जिसे न्यायिक हलकों में डिमोशन के तौर पर देखा जा रहा है।

FIR आदेश और उसके बाद की हलचल

9 जनवरी को सीजेएम विभांशु सुधीर ने संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली लगने के मामले में एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई थी। यह आदेश उस समय आया जब संभल हिंसा को लेकर प्रदेश की राजनीति पहले ही गरमाई हुई थी।

CJM पद क्यों माना जाता है अहम

सीजेएम पद मजिस्ट्रेट न्यायपालिका का सबसे वरिष्ठ पद होता है। इस पद पर बैठे अधिकारी के पास न केवल न्यायिक, बल्कि व्यापक प्रशासनिक अधिकार भी होते हैं। ऐसे में किसी सीजेएम को हटाकर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) बनाया जाना सामान्य तबादले से कहीं अधिक गंभीर माना जाता है। यही वजह है कि विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

आदित्य सिंह बने नए CJM

विभांशु सुधीर के स्थान पर चंदौसी के सीनियर डिवीजन सिविल जज आदित्य सिंह को संभल का नया मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। आदित्य सिंह को एक सख्त और अनुशासित न्यायिक अधिकारी के रूप में जाना जाता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नए सीजेएम संभल हिंसा से जुड़े मामलों में आगे क्या रुख अपनाते हैं।

मकर संक्रांति और विवादित संयोग

दिलचस्प बात यह भी है कि एफआईआर के आदेश के बाद एएसपी अनुज चौधरी मकर संक्रांति के अवसर पर गोरखनाथ पीठ दर्शन के लिए गए थे। इस घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी कई तरह की चर्चाएं और सवाल उठे। कुछ लोग इसे महज संयोग मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं।

हाईकोर्ट की तबादला सूची में 14 नाम

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन जिला जज स्तर समेत कुल 14 न्यायिक अधिकारियों के तबादले की अधिसूचना जारी की है। यह अधिसूचना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मंजीत सिंह श्योराण द्वारा जारी की गई। इस सूची में कई अहम नाम शामिल हैं, जिनके तबादले ने न्यायिक गलियारों में चर्चा को तेज कर दिया है।

प्रमुख तबादले इस प्रकार हैं

  • हरेन्द्रा नाथ को कन्नौज में पॉक्सो विशेष अदालत का स्पेशल जज बनाया गया।
  • अलका यादव को कन्नौज से गोंडा भेजा गया।
  • विकास को गोंडा में फास्ट ट्रैक कोर्ट का जज बनाया गया।
  • उरूज फातिमा सीतापुर की एडिशनल सीजेएम बनीं।
  • अंशु शुक्ला को सिविल जज सीनियर डिवीजन बनाया गया।
  • गौरव प्रकाश बने सीतापुर के सीजेएम।
  • राजेंद्र कुमार सिंह को कन्नौज का सीजेएम बनाया गया।
  • श्रद्धा भारतीया को सिविल जज सीनियर डिवीजन कन्नौज बनाया गया।
  • ज्योत्सना यादव एडिशनल सीजेएम कन्नौज बनीं।
  • स्नेहा को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का सचिव बनाया गया।
  • अलुनक्रिता शक्ति त्रिपाठी बनीं सुल्तानपुर की सीजेएम।
  • शुभम वर्मा सुल्तानपुर में सिविल जज बनाए गए।

न्यायिक स्वतंत्रता पर उठते सवाल

विभांशु सुधीर के तबादले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या न्यायिक अधिकारियों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा सकता है? क्या किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ एफआईआर का आदेश देना न्यायिक करियर पर असर डाल सकता है? कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि तबादले न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन जब वे किसी बड़े फैसले के तुरंत बाद हों, तो संदेह स्वाभाविक है।

संभल हिंसा मामला अभी भी सुलगता सवाल

24 नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा आज भी प्रदेश के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। गोलीबारी, पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाओं ने कई परिवारों को तबाह कर दिया था। ऐसे में इस केस से जुड़े हर प्रशासनिक और न्यायिक फैसले पर जनता की नजर बनी हुई है।

आगे क्या बदलेगा?

अब जब नया सीजेएम नियुक्त हो चुका है और तबादलों की पूरी सूची सामने आ चुकी है, तो सवाल यह है कि क्या संभल हिंसा मामले की जांच और सुनवाई की दिशा बदलेगी? क्या पीड़ितों को वही न्याय मिलेगा जिसकी उन्हें उम्मीद है?

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