उत्तर प्रदेश में सुरक्षा तैयारियों को परखने और आम जनता को आपात हालात के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से शुक्रवार को एक अभूतपूर्व ब्लैकआउट मॉकड्रिल आयोजित की गई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ हुए इस अभ्यास के दौरान करीब 10 मिनट तक पूरी तरह अंधेरा छाया रहा, सायरन गूंजे और हवाई हमले जैसे हालात बनाकर प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और आम नागरिकों की तैयारियों को परखा गया।
उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा अभ्यास देखने को मिला, जब प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ ब्लैकआउट मॉकड्रिल आयोजित की गई। यह मॉकड्रिल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर की गई, जिसका उद्देश्य हवाई हमले, युद्ध जैसी परिस्थितियों या किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन और आम नागरिकों की तैयारियों का आकलन करना था।
सायरन के साथ शुरू हुआ अभ्यास
शाम होते ही जैसे ही निर्धारित समय आया, जिलों में अचानक सायरन बजने लगे। चंद सेकंड में ही सड़कें, सरकारी इमारतें, कॉलेज परिसर और रिहायशी इलाके अंधेरे में डूब गए। करीब 10 मिनट तक पूरे इलाके में पूर्ण ब्लैकआउट रहा। लोगों से पहले ही अपील की गई थी कि वे घरों में रहें और किसी भी प्रकार की रोशनी का उपयोग न करें।
बम धमाके और आग की स्थिति बनाई गई
मॉकड्रिल को यथार्थ के बेहद करीब रखने के लिए कई जिलों में बम विस्फोट और आग लगने जैसी घटनाओं का दृश्य तैयार किया गया। कॉलेज परिसरों और खुले मैदानों में युद्ध जैसा माहौल दिखाई दिया। अचानक लगी आग और धुएं के बीच फायर ब्रिगेड की टीमों ने तत्काल मोर्चा संभाला और आग पर काबू पाया।
रेस्क्यू ऑपरेशन में दिखी पूरी ताकत
सिविल डिफेंस, एनसीसी, स्काउट गाइड और स्थानीय वॉलंटियर्स ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। घरों और इमारतों में फंसे ‘घायल’ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल भेजने का अभ्यास भी किया गया, जिससे यह परखा जा सके कि आपात स्थिति में मेडिकल रिस्पॉन्स कितना तेज और प्रभावी है।
प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद
इस पूरे अभ्यास के दौरान जिला मजिस्ट्रेट (DM), पुलिस अधीक्षक (SP) समेत तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। प्रमुख सचिव नागरिक सुरक्षा के निर्देश पर इस मॉकड्रिल को सख्ती से लागू किया गया और हर जिले में इसकी निगरानी की गई।
GIC कॉलेज बना अभ्यास का केंद्र
कई जिलों में राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) परिसर को मॉकड्रिल का मुख्य केंद्र बनाया गया। यहां युद्ध जैसी स्थिति, ब्लैकआउट, रेस्क्यू और राहत कार्यों का समन्वित अभ्यास किया गया। छात्रों और कैडेट्स ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
जनता से की गई अपील
प्रशासन ने पहले ही जनता से अपील की थी कि मॉकड्रिल के दौरान घबराएं नहीं। लोगों को अपने घरों में रहने, बाहर न निकलने, टॉर्च या माचिस का प्रयोग न करने और धूम्रपान से बचने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभ्यास पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित है।
क्यों जरूरी है ब्लैकआउट मॉकड्रिल?
अधिकारियों के अनुसार, ब्लैकआउट मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि अगर किसी दुश्मन देश द्वारा हवाई हमला किया जाए या युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तो प्रशासन और नागरिक कितनी तेजी और समझदारी से प्रतिक्रिया देते हैं। पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देशभर में किए गए मॉकड्रिल के बाद से ऐसी तैयारियों को और मजबूत किया जा रहा है।
जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
एडीएम ने बताया कि इस तरह के अभ्यास से न केवल सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों का परीक्षण होता है, बल्कि आम नागरिकों में भी जागरूकता बढ़ती है। लोग सीखते हैं कि अंधेरे, अफरा-तफरी और खतरे के बीच खुद को और दूसरों को कैसे सुरक्षित रखना है।
सफल रहा अभ्यास
करीब 10 मिनट बाद जैसे ही दोबारा सायरन बजा, ब्लैकआउट समाप्त हुआ और धीरे-धीरे लाइटें जल उठीं। प्रशासन ने मॉकड्रिल को सफल बताया और कहा कि इससे कई महत्वपूर्ण जानकारियां और सुधार के बिंदु सामने आए हैं, जिन पर आगे काम किया जाएगा।